विश्व एलर्जी जागरूकता सप्ताह 13-19 जून पर विशेष एलर्जी -जानें, समझें, बचाव करें और होम्योपैथी अपनायें

एलर्जी की समस्या की गम्भीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है विश्व एलर्जी आर्गेनाइजेशन द्वारा एलर्जी से बचाव, उपचार के सम्बन्ध में जनसामान्य में जागरूकता लिए विश्व एलर्जी जागरूकता सप्ताह का आयोजन 13 - 19 जून तक प्रतिवर्ष किया जाता है। दुनिया में करोड़ो लोग एलर्जी की समस्या से पीड़ित हैं और देश के लगभग 25% जनसँख्या किसी न किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या से ग्रषित हैं। एलर्जी एक ऐसी स्थिति है जो किसी चीज को खाने या उसके संपर्क में आने पर आपको बीमारी का अहसास कराती है। एलर्जी किसी व्यक्ति को तब होती है जब उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली यह विश्वास हो जाता है कि उसने जो चीज खाई है या जिस चीज के संपर्क में आया है वह शरीर के लिए नुकसानदेह है। शरीर की रक्षा के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी उत्पन्न करती है और यह एंटीबाडीज शरीर की ऊर्जा कोशिकाओं को प्रेरित करती हैं कि वे रक्त में विभिन्न रसायनों को जारी करें इन्ही रसायनों में से एक है हिस्टामिन यह हिस्टामिन आंखों, नाक, गले, फेफड़ों, त्वचा या पाचन मार्ग पर कार्य करता है और एलर्जी संबंधी प्रतिक्रिया के लक्षण उत्पन्न करता है। जब शरीर एलर्जी पैदा करने वाली चीज अर्थात एलर्जन के विरुद्ध एंटीबॉडी का निर्माण कर लेता है तब एंटीबॉडी उस चीज को पहचान जाती है उसके पश्चात शरीर हिस्टामिन को रक्त में प्रवाहित कर देता है जिससे एलर्जी के लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ लोग एलर्जी के आसान से शिकार हो जातें हैं क्योंकि उनमें एलर्जन के प्रति संवेदनशीलता जन्मजात होती है। लड़कों में लड़कियों के मुकाबले आनुवांशिक रूप से एलर्जी होने की संभावना अधिक होती है। एलर्जी की गम्भीरता का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि इससे वेहोशी भी हो सकती है जो जानलेवा भी हो सकती है। एलर्जी कई प्रकार की होती है कई खाद्य पदार्थ, रसायन, धूल ,दवाइयाँ और फूलों के परागकण एलर्जी पैदा कर सकते हैं। एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों आधार पर एलर्जी को कई प्रकारोँ में विभाजित किया गया है। भोज्य पदार्थों से एलर्जी: इस तरह की एलर्जी की गम्भीरता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत में करीब 3 प्रतिशत वयस्क और 6 से 8 प्रतिशत बच्चे फूड एलर्जी के शिकार हैं। कई लोगों को गेहं ,राई, बाजरा, मछली, अंडे, मूंगफली, सोयाबीन के दूध से बने उत्पाद, सूखे मेवे आदि से भी एलर्जी होती है जबकि बैंगन, खीरा, भिंडी, पपीता आदि से भी कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या देखी गई है। भोज्य जनित एलर्जी के कारण - उल्टी और दस्त की समस्या होना। - भूख न लगना। - मुंह, गला, आंख, त्वचा में खुजली होना। - पेट में दर्द और मरोड़ होना। - रक्त का दबाव कम हो जाना आदि के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। कैसे बचें: जिन चीजों से एलर्जी हो व्यक्ति को उनसे बचना चाहिए। जब आप घर से बाहर खाना खाएं तो यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि खाने में आपको एलर्जी उत्पन्न करने वाली चीजेँ तो शमिल तो नहीं है। पेट्स (जानवरों)से होने वाली एलर्जी: जानवरों की लार, मृत त्वचा, फर और यूरीन में जो प्रोटीन पाया जाता है वह एलर्जन कहलाता है इससे एलर्जी हो सकती है। जानवरों के फर में परागकण, धूल और दूसरे एलर्जन भी भर जाते हैं जिनसे एलर्जी और गंभीर रूप धारण कर लेती है। एलर्जी से पीड़ित 15 से 30 प्रतिशत लोगों को बिल्ली और कुत्ते जैसे पालतू जानवरों से भी एलर्जी सकती है। बिल्लियां कुत्तों से ज्यादा एलर्जी फैलाती हैं क्योंकि वह खुद को ज्यादा चाटती हैं। जानवरों से होने वाली एलर्जी में पलकों और नाक की त्वचा का लाल हो जाना, सूज जाना और उसमें खुजली होना आदि लक्षण हो सकते हैं। कैसे बचें पेट्स एलर्जी से: पालतू जानवर के सीधे संपर्क में आने पर अपने हाथ साबुन से धोएं। ऐसे जानवर को नियमित नहलाएं। धूल( डस्ट) एलर्जी ; एक अनुमान के अनुसार एलर्जी के शिकार लोगों में से करीब 80 प्रतिशत लोगों को धूल ( डस्ट )से एलर्जी होती है। डस्ट एलर्जी में - आंखें लाल होना, उनमें खुजली,त्वचा पर चकत्ते होना ,त्वचा का लाल होना,छींकें आना,नाक बंद होना, गले मे खराश होना और नाक से पानी बहना। - नाक बहे, उसमें खुजली हो, सू-सू की आवाज आए आदि के लक्षण हो सकते है। कैसे बचें डस्ट एलर्जी से : डस्ट एलर्जी से बचने के लिए - निर्माण कार्य वाली जगहों पर जाने से बचें। - ऐसे लोग दोनों समय गुनगुने पानी से नहाएं। अनेक एलोपैथिक दवाइयाँ जैसे : टेट्रा साइक्लीन, पेनिसिलिन, डिलानटिन, सल्फोनामाइड्स आदि भी एलर्जी पैदा करती हैं। पर्यावरण से होने वाली एलर्जी : पर्यावरण में पाये जाने वाले परागकण, फफूंद, धूल, आर्द्रता,धुवाँ आदि के कारण भी एलर्जी हो सकती है। रसायन : अनेक प्रकार के रसायन जैसे कोबाल्ट, निकिल, क्रोमियम सहित अनेक रासायनिक पदार्थों से भी एलर्जी हो सकती है। एलर्जी से कैसे वचें: - मौसम में बदलाव होने पर सावधान रहें। - एलर्जी की दवाओं का उचित समय पर सेवन करें। अगर लक्षण गंभीर हो जाएं तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा की मात्रा न बढ़ाएं। - भीड़भाड़ या अधिक ट्रैफिक वाले स्थान पर मास्क का प्रयोग करें। - सोने से पहले अपने बालों को नियमित रूप से धोए ताकि उनसे एलर्जन निकल जाएं। - जूतों को घर के बाहर ही उतारें। - गर्मियों में घर के दरवाजे, खिड़कियां और कार के शीशे अधिक खुले रखने से एलर्जी फैलाने वाली चीजें आसानी से आप तक पहुंच सकती हैं। इसलिए पर्दे डालकर या दरवाजे बंद रखें। - अस्थमा को सर्दियों का रोग मानकर इस मौसम में दवा लेने में लापरवाही न बरतें। - जिन चीजों से एलर्जी की संभावना है उनसे बचें। एलोपैथिक पद्धति में जहाँ एन्टी एलर्जिक दवाईओं को लेने तथा एलर्जी पैदा करने वाली बस्तुओं से परहेज की सलाह दी जाती है। होम्योपैथी में एलर्जी के उपचार की अनेक कारगर औषधियाँ उपलब्ध है जिनका चयन एवँ निर्धारण रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों , आचार-विचार, व्यवहार, पसंद-नापसंद के आधार पर किया जाता है।
डॉ अनुरूद्व वर्मा, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक 9415075558

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