छोटे राज्यों के निर्माण से होगा क्षेत्र का विकास : बुविसे

बुन्देलखण्ड निर्माण से पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का सपना होगा साकार ललितपुर। स्थानीय कम्पनी बाग में बुन्देलखण्ड प्रान्त निर्माण के सम्बन्ध में एक बैठक बुन्देलखण्ड विकास सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने कहा कि इस सम्बन्ध में सोमवार 14 जून को बु.वि.सेना प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपेगी। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड की जनता अपना प्रांत बुन्देलखण्ड प्रान्त का सपना संजोये हुए जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के आश्वासनों के झूले में झूलते हुए लम्बा वक्त गुजार चुकी है, लेकिन सपना कब हकीकत में तब्दील हो, ये समय की गोद में छुपा हुआ है। लेकिन हमारे राजनेता, हमारे अपने ही जनप्रतिनिधि, हमारी माटी में पले-बढ़े और सत्ता और सम्मान को प्राप्त करने के उपरान्त भी इस क्षेत्र की जनता का भला करने, उनके सपनों की उड़ानें भरने की आकांक्षा को पूरा करना तो दूर, झूठ का पुलिंदा थमाकर अपना उल्लू सीधा करने में जुटे रहते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम को अपना आराध्य मानने वाली और उनके बताये रास्ते पर चलने का दम्भ भरने वाली तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री और क्षेत्र की सांसद उमा भारती ने तीन साल में बुन्देलखण्ड प्रान्त बनाने का वायदा क्षेत्र की जनता से किया था,
परन्तु आज लगभग 7 साल गुजरने बाद भी नतीजा शून्य रहा। बु.वि. सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने कहा कि हमारा संगठन पिछले 25 वर्ष से बुन्देलखण्ड प्रान्त बनाओ की मांग को गाँधीवादी तरीके से उठाता आ रहा है। आजादी के पहले और आजादी के बाद के बुन्देलखण्ड क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन करें तो हम पाते हैं कि देश के इस सबसे पिछड़े भूभाग की व नागरिकों की दिशा और दशा में कोई आमूलचूल परिवर्तन नहीं आया है। उन्होंने ने कहा कि राष्ट्र को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने व अँग्रेज शासकों को लोहे के चने चबाने को मजबूर करने वाली महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मस्थली, रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, हाकी के जादूगर दद्दा मेजर ध्यानचंद, महान उपन्यास सम्राट बाबू वृन्दावनलाल वर्मा की जन्मस्थली व कर्मस्थली बुन्देलखण्ड की पावन धरती अपनी उपेक्षा, बदहाली और दुर्दशा पर खून के आँसू बहाने को मजबूर है। उद्योगशून्यता, उच्च, व्यवसायिक, एवं तकनीकी शिक्षा, सडक़ बिजली पानी, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताएं, बेरोजगारों की लंबी फौज, कभी सूखा तो कभी बाढ़ जैसी विभीषिकाएं, सामंतशाही, दबंगई, सूदखोरी, भ्रष्टाचार व अत्याचार के अलावा अभी लगभग डेढ़ साल से कोविड 19 जैसे शूलों के दंश की पीड़ा सहने को हम बुन्देलखण्डवासी मजबूर हैं। इस मौके पर वरिष्ठ सदस्य राजमल बरया, महेन्द्र अग्निहोत्री, राजेन्द्र गुप्ता, सुदेश नायक, हेमन्त, अनूप ताम्रकार, सिद्धार्थ शर्मा, मुहम्मद फहीम, हनुमत हलवाई, भगवत वर्मा, परवेज पठान, महेन्द्र शुक्ला, विजय उपाध्याय, कदीर खां, शिखर उमरिया, गौरव विश्वकर्मा, पुष्पेन्द्र शर्मा, मुन्ना त्यागी, नंदराम कुशवाहा, कामता प्रसाद, लोकेश रैकवार, सोनू राजा, प्रदीप रैकवार, रवि रैकवार, मुजम्मिल पठान आदि उपस्थित रहे।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हिन्दी में प्रयोग हो रहे किन - कौन किस भाषा के शब्द

बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन : विहंगम दृष्टि

हत्या का पुलिस ने कुछ ही घंटों मे किया खुलासा