बोली के आधार पर ही बुन्देलखण्ड प्रान्त मंजूर होगा : हरीश कपूर टीटू

बु.वि.सेना ने फिर उठाई पृथक बुन्देलखण्ड की मांग
प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा
ललितपुर। बुन्देलखण्ड विकास सेना ने बुन्देलखण्ड अलग राज्य की मांग को लेकर एक ज्ञापन बुन्देलखण्ड विकास सेना प्रमुख  हरीश कपूर टीटू के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से संबोधित जिलाधिकारी को सौपा। इस ज्ञापन की प्रतिलिपियां उ.प्र. सरकार और म.प्र. सरकार को भेजी गई हैं।         बु.वि.सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने कहा कि महाराजा छत्रसाल का राज्य जहाँ जहां तक फैला था वहीं असली बुन्देलखण्ड है। उन्होंने कहा कि राज्य पुनर्गठन आयोग का मूल मानक है कि राज्यों का बंटबारा स्थानीय बोलियों के आधार पर किया जाना चाहिए। अत: बुन्देलखण्ड से अलहदा कोई दूसरा क्षेत्र जोड़ा जाता है तो यह बुन्देलखण्डवासियों के साथ घोर नाइंसाफी होगी। उन्होंने कहा कि महाराज छत्रसाल ने बुन्देलखण्ड की स्वाभाविक सीमा जो प्राकृतिक रूप नदियों ने अनादिकाल से बनाई है वही वास्तविक बुन्देलखण्ड है। इत चंबल उत नर्मदा, इत जमुना उत टोंस, छत्रसाल सें लरन की, काऊ न राखि हौंस। उन्होंने कहा कि इसका आशय यह है कि बुन्देलखण्ड राज्य की सीमा में झांसी , ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, भिण्ड, मुरैना दतिया, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह, विदिशा, नरसिंहपुर आदि जिले शामिल हैं। ज्ञापन में आगे कहा गया है कि बुन्देलखण्ड के महत्व को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू ने विन्ध्य प्रदेश बनाया था अत: तभी से इसके विस्तार की चर्चा होती चली आ रही है। अब और इन्तजार किसी भी तरह से तार्किक नहीं है क्योंकि देश की ठसाठस आबादी के दो पाटों के बीच में खाता-पीता वर्ग तो अपना काम जैसे-तैसे चला लेता है किन्तु कोटि कोटि किसान और मजदूर तथा अन्य असंगठित कामगार भगवान भरोसे चल रहे हैं। अत: विकास की दौड़ में हांफता हुआ बुन्देलखण्ड प्रान्त निर्माण के ऑक्सीजन सपोर्ट की अबिलम्ब दरकार की आस लगाये हुए है। ज्ञापन पर बु. वि.सेना के वरिष्ठ सदस्य महेन्द्र अग्निहोत्री, सुदेश नायक, हेमन्त रोड़ा, आनंद दुबे, राजकुमार कुशवाहा, अमरसिंह बुन्देला, विनोद साहू, मुन्ना महाराज त्यागी, अमित जैन, बृजेश पारासर, प्रदीप गोस्वामी, बलबानसिंह यादव, परवेज पठान, महेन्द्र शुक्ला, विजय उपाध्याय, कदीर खां, गौरव विश्वकर्मा, अक्षय अन्ना, सक्षम साहू, हिमांशु विश्वकर्मा, पंकज रैकवार आदि हस्ताक्षर रहे।

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