उदासीनता तीन वर्ष से नही हो रही अधिशासी अभियंता सिविल की पदोन्नति

लोक निर्माण विभाग में 366 पदों में से 200 से अधिक रिक्त
बैक डोर प्रभारी बनाने की प्रक्रिया का संघ करेगा पुरजोर विरोध: द्विवेदी
लखनऊ 06 जून। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश सरकार का ध्यान एक विशेष विषम परिस्थिति की तरफ आकर्षित कराते हुए विभागीय अधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय में पदोन्नति के संबंध मे चल रहे बंच केस को मेंशन कराते हुए अंतिम निर्णय कराने मांग की है। संघ के अध्यक्ष इं. एन.डी द्विवेदी ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण नहीं हो रही है 3 वर्ष से अधिशासी अभियंता सिविल के पद पर पदोन्नति नही हो पाई है। विभाग में कुल 366 पदों में से 200 से अधिक रिक्त है। 105 सहायक अभियंता सिविल के पद भी विवाद में फॅसे है। डेढ़ वर्ष में एक बार भी विभाग की तरफ से उच्च न्यायालय में बंच केस मेंशन नहीं किया गया। विभाग के कतिपय अधिकारी बैक डोर से प्रभारी अधिशासी अभियंता बनाने की प्रक्रिया अपनाने जा रहे है जिसका संघ हर स्तर पर विरोध करेगा। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग के अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी ने कहा है कि वर्ष 2002 से ही कुछ अधिकारी कर्मचारी मिलीभगत कर अपात्र डिग्री धारी को बैक डोर से सहायक अभियंता बनाने का कार्य करते आ रहे हैं जिसको समय-समय पर उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न रिट याचिकाओं में निरस्त किया जाता रहा है अंततः प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2019 को समस्त याचिकाओं को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद रिमांड करते हुए 6 महीने के अंदर निस्तारित करने का निर्देश दिया माननीय मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 31 एक 2020 को निर्णय पारित करते हुए निर्देश दिया कि बंच केस में सभी लगभग 40 याचिका अंतिम सुनवाई हेतु परिपक्व हैं अतः उसकी सुनवाई खंडपीठ लखनऊ में ही की जाएगी और इसके लिए उन्होंने विशेष बेंच भी नामित कर दी है। 20 फरवरी 2020 को विशेष बेंच द्वारा सुनवाई प्रारंभ की गई कोरोना संक्रमण के कारण कुछ अवधि तक सुनवाई बाधित रही बाद में नामित बेंच सुनवाई हेतु पुनः उपलब्ध रही । 20 जुलाई 2020 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः उच्च न्यायालय को इस प्रकरण की अंतिम सुनवाई त्वरित गति से करने का निर्देश निर्गत किया इस बंच केस के लंबित होने के कारण सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पदों पर पदोन्नति विगत 3 वर्ष से रुकी हुई है। परिणाम स्वरूप प्रदेश के कुल 366 अधिशासी अभियंता सिविल के पदों में से 200 से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। इसी प्रकार 105 सहायक अभियंता सिविल के पद पर 7 वर्ष से पदोन्नति रुकी हुई है विभागीय अधिकारियों द्वारा इस संबंध में कोई भी रुचि नहीं ली गई विगत डेढ़ वर्षों में एक बार भी माननीय उच्च न्यायालय में विभाग की तरफ से बंच केस मेंशन नहीं किया गया जब विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में कहा जाता है तो वह स्वयं न जाकर लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को इस कार्य हेतु भेजते हैं जो ना तो अधिकृत है नहीं उन्हें कोई रिस्पांस मिलता है। इस प्रकार विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण अधिशासी अभियंता एवं सहायक अभियंता के पद भारी संख्या में कई वर्षों से रिक्त हैं। विकास कार्य प्रभावित हैं ।कई एक अधिकारियों को चार चार पदों के चार्ज दिए गए है। बैक डोर से कुछ अधिकारी विवादित सहायक अभियंताओं को अधिशासी अभियंता का प्रभार देने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इन्हें उच्च न्यायालय में केस मेंशन कराकर अंतिम सुनवाई करवानी चाहिए एवं आवश्यकतानुसार न्यायालय से निर्देश प्राप्त करने चाहिए। प्रदेश के महाधिवक्ता द्वारा भी इसी प्रकार का सुझाव शासन को दिया गया है। विवादित वरिष्ठता के आधार पर प्रभारी बनाए जाने का संघ पुरजोर विरोध करेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया नए विवादों को जन्म देगी। 7 जून 2021 से बंच केस हेतु नामित बेंच उच्च न्यायालय में उपलब्ध है। इसीलिए संघ ने शासन और सरकार से मांग की है कि प्रदेश के महाधिवक्ता द्वारा दिए गए सुझाव के क्रम में उच्च न्यायालय में बंच केस को मेंशन कराने हेतु जिम्मेदार अधिकारी को नामित कर उन्हें आवश्यक निर्देश दे। जिसका समर्थन न केवल संघ अपितु बंच केस से संबंधित अन्य पक्ष भी करेंगे और यही न्यायोचित प्रक्रिया है।

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