बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी की समीक्षा बैठक सम्पन्न

लखनऊ: 23 जून, 2021 विश्वविद्यालय का कार्य केवल परीक्षा कराना नहीं है बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी डिग्री समय से उपलब्ध कराना भी है। अतः सभी विश्वविद्यालय तथा सम्बद्ध महाविद्यालय छात्रों की डिग्री यथाशीघ्र भिजवाना सुनिश्चित करें। इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। ये निर्देश उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के साथ राजभवन लखनऊ से आनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नही है। कुलाधिपति ने लम्बित डिग्री/प्रमाण पत्रों के वितरण कार्य ठीक तरह एवं ससमय नहीं करने पर नाराजगी जताई तथा निर्देश दिया कि उपाधियां प्रत्येक दशा में दीक्षान्त के तत्काल बाद विद्यार्थियों को उपलब्ध करा दी जाय। राज्यपाल जी ने सुझाव दिया कि डिग्री वितरण के लिये यथाशीघ्र डिजिटल लाॅकर की व्यवस्था की जाय। कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में रिक्त पदों के लिये निर्धारित नियुक्ति नियमावली का पालन करते हुये रोस्टर के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुये नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि भर्ती विज्ञापनों में स्पष्ट रूप से विज्ञापन में नियुक्ति प्रक्रिया की शर्तों का उल्लेख किया जाय। कुलाधिपति ने कहा कि महालेखाकार तथा स्थानीय आडिट की आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण किया जाय तथा वित्तीय अनियमितता से बचने हेतु वित्तीय नियमों का पालन करें। इसके साथ ही बैलेंस सीट एवं कैश बुक भी नियमित रूप से तैयार की जाय तथा निष्प्रयोग व अनुपयोगी खाते बंद कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी दशा में गैर अनुमन्य भत्ते, ओवर टाइम तथा अग्रिम अपने कर्मचारियों को न दें। राज्यपाल ने बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यकता से अधिक उत्तर पुस्तिकाएं तथा ओ0एम0आर0 सीट प्रिंट कराने के लिए नाराजगी जताई तथा आवश्यकतानुसार ही उत्तर पुस्तिकायें प्रिंट कराने के निर्देश दिये। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय में चल रहे महिला अध्ययन केन्द्रों को गतिशील बनाते हुये उनमें महिलाओं के लिए स्वच्छता, स्वावलम्बन, शिक्षा, रोजगार, स्वच्छ पेयजल आदि के कार्यक्रम प्रमुखता से चलाने के निर्देश दिये। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय अपने परिसर में तथा ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सम्मेलन आयोजित करें, जिसमें नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों, स्वयं सहायता समूहों तथा समाज की अग्रणी महिलाओं को शामिल करें तथा इस प्रकार के कार्यक्रमों में केन्द्र एवं राज्य सरकार की लाभार्थी परक तथा रोजगार परक, विभिन्न योजनाओं की जानकारी दें, साथ ही इन कार्यक्रमों में कुपोषण, क्षय रोग, गर्भवती महिलाओं शिशु मृत्युदर कम करने के उपाय, साक्षरता आदि विषयों को प्रमुखता से शामिल करें इससे नव निर्वाचित प्रधान इन बातों से भली-भांति परिचित हो जायेंगी कि वे अपनी ग्राम सभा में किन-किन कार्यक्रमों को लागू कर सकती हैं और अपनी ग्राम सभा के लोगों को लाभान्वित कर सकती हैं। कुलाधिपति ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। इसलिए नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों को सक्रिय किये जाना जरूरी है ताकि वे निगरानी स्थितियों के माध्यम से अपनी ग्रामसभा में सेनेटाइजेशन के साथ-साथ कोरोना किट बंटवा सके तथा टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुये अपने पंचायत क्षेत्र को शत-प्रतिशत टीकाकरण करा सके। इस अवसर पर कुलाधिपति ने नयी शिक्षा नीति, शैक्षिक सत्र, विश्वविद्यालय की आवासीय व्यवस्था, विश्वविद्यालय के लम्बित मुकदमों आदि पर विस्तृत चर्चा की तथा संबंधित प्रकरणों को नियमानुसार ससमय निस्तारित करने के निर्देश दिये। बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता, विशेष कार्याधिकारी डा0 पंकज जानी, विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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