नितिन रमेश गोकर्ण पहले आईपीएस फिर बने आईएएस

मन कहीं दूर भविष्य के प्रति विचारोन्मुख था। पुलिस अधिकारी की भूमिका में 3 वर्षों तक कार्य करने के दौरान महसूस किया कि वह आईएएस के रूप में ज्यादा सहजता और सरलता के साथ लोगों के लिए कार्य कर सकते हैं। नौकरी के दौरान ही प्रथम प्रयास में ही आईएएस बन गए। शिक्षा के प्रति प्रारंभ से ही संवेदनशील रहे श्री गोकर्ण को उत्तर प्रदेश की नौकरशाही के बीच सरल हृदय और एक ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचाने जाते है। शास्त्रीय संगीत के शौकीन श्री गोकर्ण को फोटोग्राफी का भी बहुत शौक है ।प्राकृतिक परिवेश और वनो की शानदार फोटोग्राफी कई पत्र-पत्रिकाओं के आवरण की शोभा बन चुकी है। वाराणसी के कायाकल्प उनकी भूमिका को बनारसवासी जहां याद करते है वहीं दूसरी ओर ललितपुर जनपद में बरसों से सूखा अभिशप्त क्षेत्र में भागीरथ बनकर े जाखलौन पंप कैनाल के माध्यम से विरधा ब्लॉक के किसानों के जीवन में खुशहाली की सौगात दे कर सबका मन मोह चुके है। बरसों से बेतवा नदी पर बनी जाखलौन लिफ्ट कैनाल सरकारी लालफीताशाही के कारण शुरू नहीं हो पा रही थी। इस नहर को बनाने वाले लोगों को डर था जब भी पानी आएगा तो उनके क्रियाकलापों की कलाई खुल जाएगी। जिला अधिकारी के तौर पर नितिन रमेश गोकर्ण ने इस नहर को शुरू करा कर लोगों के जीवन में खुशहाली की राहें प्रदान की। ललितपुर के जिला अधिकारी के तौर पर जब पद संभाला था उसी दौरान एक पत्रिका में छपी स्टोरी से दिल्ली तक हंगामा हो गया। ललितपुर में भूख से जीवन हारा शीर्षक स्टोरी में बड़ी संख्या में मौतों का उल्लेख किया गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी के तौर पर मैंने एक पत्रकार के रूप में बात की तो उन्होंने कहा कि आप जो भी सच हो इसको अवश्य उजागर करिए, मुझे खुशी होगी सच सामने आए। हालांकि मेरी पड़ताल में प्रकाशित स्टोरी के विपरीत तथ्य प्रकाश में आए, तथ्य पर तत्कालीन समाचार पत्र दैनिक जनप्रिय में हमारे संपादक ने मर भूखा नहीं है ललितपुर शीर्षक से संपादकीय लिखा था।
नितिन रमेश गोकर्ण का जन्म उत्तर महाराष्ट्र के मुम्बई में 11 सितम्बर 1964 को हुआ था। नितिन रमेश गोकर्ण ने बांबे यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र ऑनर्स के साथ प्रथम श्रेणी में बैचलर डिग्री हासिल की। वहीं से अर्थशास्त्र में ही मास्टर डिग्री ली, इन दोनों डिग्री में आईएएस नितिन गोकर्ण गोल्ड मेडलिस्ट रहे। उसके बाद फिर चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्टकी डिग्री हासिल की। नितिन रमेश गोकर्ण ने आईएम बंगलूरू से गोल्ड मेडल के साथ मास्टर्स डिग्री हासिल की। अर्थशास्त्र के मास्टर नितिन मलिक गोकर्ण पढ़ाने का शौक रखते थे पर यह शौक उनका पूरा न हो सका। नितिन रमेश गोकर्ण को प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने की लत लग गई थी। नितिन रमेश गोकर्ण ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर 1987 बैच के आईपीएस अफसर बन गये। नितिन रमेश गोकर्ण ने उत्तर प्रदेश में आईपीएस अफसर बनकर तीन साल तक नौकरी की। उन्होंने इन तीन सालों में अपराधियों की कमर तोड़ने का काम किया था। नितिन रमेश गोकर्ण ने अपराधियों की चैखट पर लगातार दस्तक देते रहे और अपराधियों को गिरफ्तार कर बड़ेघर को भेजते रहे। आईपीएस सर्विस के दौरान ही नितिन रमेश गोकर्ण ने परीक्षा पास कर अच्छी रैंक लाकर साल 1990 बैच के आईएएस अफसर बन गये। आईएएस अफसर नितिन रमेश गोकर्ण बताते है, '' सन् 2007 में ब्यूरोक्रेसी में भी ज्यादा मन नही लग पा रहा था। चूंकि आईएएस अफसर नितिन रमेश गोकर्ण को पढ़ने और पढ़ाने का शौक था। उनका ध्यान हर समय पढ़ने और पढ़ाने की ओर ही रहता था। जनपद वाराणसी में डीएम बनने के बाद आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण ने तय कर लिया था कि ब्यूरोक्रेसी को छोड़ दूंगा। उन्होंने अवकाश भी ले लिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावाती ने मुझे बनारस का डीविजनल कमिश्नर बनाकर तत्काल ही ज्वाइनिंग के आदेश भी दिये थे। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण की मसूरी से टैªनिंग होने के पश्चात शासन ने उनको सबसे पहले जनपद शाहजहांपुर में सहायक मजिस्ट्रेट बनाकर भेजा। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को 1 जून 1992 को जनपद शाहजहांपुर से टैªनिंग के लिये देहरादून भेज दिया। उनकी ट्रैनिंग देहरादून में 7 अगस्त 1992 तक चली। टैªनिंग पूरी होने के बाद 23 जून 1993 को आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण जनपद देवरिया में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हुए। 27 जून 1994 को उनका जनपद देवरिया से तबादला हो गया। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को 28 जून 1994 को जनपद अल्मोड़ा के मुख्य विकास अधिकारी के पद की कमान मिली। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण 3 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सचिव बने। लखनऊ से ट्रांसफर होकर आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को 13 अगस्त 1997 को जनपद फिरोजाबाद के जिलाधिकारी के पद पर तैनाती मिली। उसके बाद आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण का 16 अप्रैल 1998 को ललितपुर का डीएम बना दिया गया। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण ललितपुर डीएम के पद पर लगभग 2 साल तक तैनात रहे। जनपद ललितपुर से उनको 29 मार्च 2000 को बंगलौर के काॅफी बोर्ड में सचिव की कमान मिली। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को 6 अप्रैल 2000 को बंगलौर के व्यापार विभाग के काॅफी बोर्ड में सचिव बनाया गया। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण कोलकाता में ही 11 जुलाई 2005 तक मुकर्रर रहे। कोलकाता से तबादला होने के पश्चात उत्तर प्रदेश सरकार में आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण 12 जुलाई 2005 को जल पुनर्गठन सिंचाई के सचिव बने। आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण 23 जुलाई 2005 को जनपद वाराणसी के कलेक्टर बन गये थे। 5 अप्रैल 2006 केा आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को शासन ने उत्तर प्रदेश सरकार में सूचना एवं निदेशक का सचिव बनाकर सूबे की राजधानी लखनऊ भेजा। उसके बाद आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण ने 15 मई 2007 को जनपद वाराणसी में डिवीजनल कमिश्नर के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। 2 जून 2008 को देश की राजधानी दिल्ली में आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को भारत सरकार के एम.ओ शहरी विकास का निदेशक बनाया गया। दिल्ली से आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को शासन ने लखनऊ ऑन वेटिंग में भेज दिया। 30 जून 2015 को आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण जनपद वाराणसी के संभागीय आयुक्त के रूप में तैनात हुए। उसके बाद शासन ने आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को उत्तर प्रदेश सरकार में आवास और शहरी नियोजन विभाग में प्रमुख सचिव बनाया। इसके साथ-साथ शासन ने आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण को पी.डब्लयू.डी विभाग भी सौंपा। अब आईएएस नितिन रमेश गोकर्ण 27 जून 2019 से लगातार उत्तर प्रदेश सरकार में ही पी.डब्लयू.डी विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत है।

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