"महात्मा गांधी का सर्वधर्म समभाव व धर्मांतरण की घातक वह पीड़ादायक समस्या

"महात्मा गांधी का सर्वधर्म समभाव व धर्मांतरण की घातक वह पीड़ादायक समस्या " था। मुख्य वक्ता विनोद शंकर चौबे व गांधी दर्शन के अध्येता गण श्रीमती नीलम भाकुनी, श्री आशुतोष निगम,श्री केडी सिंह ने अपने विद्वतापूर्ण विचार व्यक्त किए। गोष्ठी की अध्यक्षता गांधी दर्शन के विद्वान डॉ सूर्यभान सिंह गौतम ने किया और अपने संबोधन से विषय को साथ सार्थकता प्रदान किया। महात्मा गांधी धर्मांतरण के प्रबल विरोधी थे। उनका विचार था कि धर्म आस्था का विषय है और आस्था वस्त्र नहीं है जिसे उतार कर दूसरा पहन लिया जाए। गांधी का संपूर्ण जीवन हिंदू मुस्लिम एकता के लिए कर्मशील रहा। आज कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें हिंदू सिख लड़कियों को बहला फुसला कर दबाव डालकर उनका धर्मांतरण मुस्लिम पुरुषों द्वारा करा कर उन से विवाह किया गया है और उनकी संपत्ति भी ले ली गई है। मूक बधिर का भी धर्मांतरण इस्लाम धर्म में कराया गया है। गांधी ने ईसाई धर्म प्रचारकों को कहा था कि ...... "तुम हमें नया धर्म सिखाने को आतुर क्यों हो? हमें अच्छा हिंदू बनाओ। अच्छा नर नारी बनाओ। यही यथेष्ट है! नाम परिवर्तन से हृदय परिवर्तन नहीं होगा। " धर्मांतरण की घटनाओं से विभिन्न धर्मावलंबियों, विशेषकर हिंदू मुसलमानों में विद्वेष और दुराव हो रहा है जो उचित नहीं है। वह राष्ट्रीय एकता के लिए घातक है।

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