डॉ.अमरसिंह निकम को 'होम्योपैथिक अस्पताल के जनक' की उपाधि से सम्मानित किया गया

होम्योपैथी के क्षेत्र में बेहतरीन व सराहनीय काम करने वाले डॉ.अमरसिंह दत्तात्रेय निकम ने पूरे महाराष्ट्र में एक खास पहचान बनाया है। रविवार 25 जुलाई 2021 को गुरुपूर्णिमा व स्वामी होम्योपैथिक अस्पताल,अहमदनगर के तृतीय वर्षगाँठ के अवसर पर अहमदनगर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया था, जोकि सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। जिसमें टीम मिशन होम्योपैथी के गुरु डॉ.अमरसिंह दत्तात्रेय निकम को पिछले छब्बीस वर्षों से 'आदित्य होम्योपैथी अस्पताल और हीलिंग सेंटर' के माध्यम से होम्योपैथी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य व असाध्य रोगों के इलाज तथा रोगियों के देखभाल के लिए "होम्योपैथिक अस्पताल के जनक'" की उपाधि से सम्मानित किया गया। एशिया में पहला होम्योपैथिक अस्पताल 1995 में डॉ अमरसिंह निकम द्वारा स्थापित किया गया था।होम्योपैथी के माध्यम से ग्रॉस पैथोलॉजिकल मामलों को सफलतापूर्वक ठीक किया गया। गंभीर हृदय रोग, ब्रेन ट्यूमर, लीवर फेलियर, लकवा, निमोनिया, एक्यूट और क्रॉनिक डिजीज इत्यादि बीमारी उनके द्वारा लिखी गई थर्मल, मिशन, वाइटल फोर्स - 30 पोटेंसी इत्यादि पुस्तकों में उनके इलाज, लक्षण व अनुभव और अन्य चीजों को बताया गया है, जोकि आनेवाले डॉक्टरों का मार्गदर्शन करते है। वे होम्योपैथिक अस्पताल चलाने के तरीके के साथ-साथ सेमिनार, व्याख्यान, कार्यशालाओं के माध्यम से महामारी जैसी गंभीर स्थिति में होम्योपैथी का उपयोग करने के बारे में मार्गदर्शन करते है। निकम के आदित्य होम्योपैथिक अस्पताल में देश भर के साथ-साथ विदेशों से भी होम्योपैथिक डॉक्टर पढ़ने आते हैं। होम्योपैथी के विज्ञान के जनक जर्मनी के डॉ. सैमुअल हैनिमैन हैं, लेकिन हैनिमैन के सभी सिद्धांतों का सटीक और सही तरीके से पालन करते हुए, 14 साल के ओपीडी अभ्यास के बाद डॉ. निकम ने 1995 में पुणे के पिंपरी में चार बिस्तरों वाला होम्योपैथिक अस्पताल शुरू किया था, जिसे अब पिछले 5-6 वर्षों में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में बदल दिया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री श्रीपाद येशो नाईक, डॉ. डी वाय पाटिल उपस्थित थे। पिछले चालीस वर्षों में डॉ. निकम सर ने कई रोगियों को उनकी पुरानी बीमारियों से ठीक किया है और उन्हें नई और लंबी उम्र दी है। उन्हें उनके काम के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन अब तक उन्हें "होम्योपैथिक अस्पताल के पिता" की उपाधि नहीं मिली थी और इसीलिए उनके सभी छात्रों ने टीम मिशन होम्योपैथी के माध्यम से गुरु पूर्णिमा को मनाया। इस कार्यक्रम में होम्योपैथिक छात्रों के लिए डॉ. निकम ने अपने अनुभव को बताया और उनका मार्गदर्शन किया, जिससे वे उनके अनुभव को अपने काम में व इलाज में उपयोग कर सके और लोगों का अच्छा इलाज कर सके। इस कार्यक्रम में 100 से ज्यादा छात्रों ने उनके अनुभव का लाभ उठाया। इस कार्यक्रम के अवसर पर अहमदनगर के डॉ.साईनाथ चिंता, कोपरगांव के डॉ.शीतल कुमार सोनावणे, नासिक के डॉ. मुकेश मुसले और पुणे की डॉ.सौ. राखी मुनोत इत्यदि मौजूद रहकर कार्यक्रम को सफल बना। कार्यक्रम आयोजन को सफल बनाने के लिए डॉ. संकेत लांडे, डॉ. अनिल नवथर, डॉ. रुपेश सोनवणे, डॉ.गणेश वाघचौरे और डॉ. गणपत जाधव इत्यादि ने काफी मेहनत व सहयोग किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलेश जंगले और डॉ. सुहासिनी चव्हाण ने किया। जबकि डॉ. सुनीता चिंता व डॉ. रूपाली जंगले ने आये हुए अतिथिओं का आभार ब्यक्त किया।

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