बुंदेलखंड पहुँची निषाद कश्यप आरक्षण पदयात्रा हमीरपुर में जोरदार स्वागत

■ अनुसूचित जाति आरक्षण के लिये प्रत्येक जिले में निकालेंगे पैदल यात्रा
■ सरकार को चेतावनी आरक्षण नहीं तो वोट नहीं
■ गूँजे आरक्षण नहीं तो वोट नहीं के नारे
■ युवा नेता कुंवर सिंह निषाद कर रहे हैं नेतृत्व
■ भारी संख्या में निषाद कश्यप समाज के लोग रहे मौजूद
सर्वदलीय निषाद कश्यप यूनियन द्वारा कुंवर सिंह निषाद के नेतृत्व में अनुसूचित जाति के आरक्षण की मांग को लेकर प्रारम्भ हुई पदयात्रा आज हमीरपुर पहुँची
निषाद कश्यप समाज लंबे समय से अनुसूचित जाति आरक्षण की मांग कर रहा है भाजपा ने भी निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने का आश्वासन दिया था
पदयात्रा 11 जुलाई से मथुरा से प्रारंभ होकर आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, जालौन आदि जिलों में संपन्न हो चुकी है
कुरारा और फॉरेस्ट लाइन पर निषाद कश्यप समाज के लोगों द्वारा यात्रा का स्वागत हुआ
पदयात्रा का सुभारम्भ हुआ सहजना के जिसमें भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया
पदयात्रा चंदुलितीर से प्रारम्भ होकर, कलौलीतीर, सहजना पर सम्पन्न हुई
कई स्थानों पर सभाएं भी हुईं जिसमें यात्रा को संबोधित करते हुए यात्रा संयोजक कुँवर सिंह निषाद ने कहा कि यदि सरकार आरक्षण नहीं दिया तो सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए निषाद कश्यप समाज संकल्पित है, निषाद कश्यप समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने का वादा भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र का अंग रहा है अब भाजपा अपने वादे से मुकर रही है उन्होंने कहा कि दिल्ली की सल्तनत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है यदि हमारी आवाज दबाई गई तो दिल्ली और लखनऊ दोनों को ही मोदी और योगी के लिये सपना बन जायेगा, साथ ही कुँवर निषाद ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी जी अपनी मोड़ घांची जाति को आरक्षण दे सकते हैं तो उत्तर प्रदेश के निषादों से क्या दुश्मनी है। एकलव्य वेलफेयर सोसायटी के संयोजक विनोद सहनी ने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया हमारे समाज को गुमराह करने वाला है हमें धोखे में रखा जा रहा है आरक्षण नहीं तो वोट नहीं ये हमारा नारा नहीं बल्कि हमारा संकल्प है। राष्ट्रीय एकलव्य सेना के जिलाध्यक्ष उमेश निषाद ने कहा कि यदि हमारी माँगों को नजरअंदाज किया को भाजपा की नैया डुबाने के लिये हम कमर कस चुके हैं पदयात्रा में मुख्यरूप से हरिकेश निषाद पूर्व प्रधान, विनोद निषाद प्रधान, हरिओम निषाद, मुकेश निषाद, अरविंद निषाद, विमल निषाद, अशोक, छोटू निषाद, नंदराम निषाद, बृजेश निषाद, बबलू, शिवचरण निषाद, रामबाबू, रामप्रसाद, चंद्रशेखर निषाद, वेदराम निषाद, रामवरन निषाद, अमरचंद निषाद, बाबू निषाद, सिपाही लाल निषाद शामिल रहे।

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