योगी राज में यूपी पुलिस व प्रशासन ने मनमाना व ग़ैरक़ानूनी रवैया अपना रखा है-विकास श्रीवास्तव


 लखनऊ, 05 सितम्बर 2021


             उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते  दुःसाहसिक व जघन्यतम अपराधों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में प्रदेश में बढ़ रही महिला हिंसा व अराजकता की घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के प्रति योगी आदित्यनाथ सरकार की अत्यंत कमजोर इच्छा शक्ति और अमानवीयता को उजागर कर दिया है। महिलाओं के साथ हुई हिंसा व आपराधिक वारदातों को लेकर योगी सरकार पर उठे सवाल उनके पूरे कार्यकाल भर अनुत्तरित ही रहें। यूपी के लगभग समस्त जिलों से आये दिन आ रही बलात्कार, हत्या जैसे जघन्य अपराधों की मीडिया की खबरों से स्पष्ट है कि एनसीआरबी के आंकड़ों को सरकार कितना भी छुपाए, अस्वीकार करें, जमीनी वास्तविकता अत्यंत भयावह है। एनसीआरबी के आकड़ो को छुपा कर व नकार कर खुद की पीठ थपथपा रही है, जिसका माकूल जवाब प्रदेश की महिलाएं आगामी 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बुरी तरह पराजित करके देगी।

             कांग्रेस प्रवक्ता श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र समेत यूपी सरकार एनसीआरबी के आंकड़ों को अस्वीकार करने के साथ ही एनसीआरबी की वेबसाइट पर अपराध को लेकर वास्तविक आकड़े भी अपडेट्स नही है। योगी पुलिस के जिम्मेदार अधिकारियों ने व खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा ही एनसीआरबी द्वारा दिए गए आंकड़ों से इनकार किया है। मौजूदा योगी सरकार का कहना है कि अन्य राज्य की तुलना में यहां की जनसंख्या के आधार पर अपराध की गणना के अनुसार यहां हर तरह के अपराध पर काबू पाया गया हैं और एनसीआरबी पंजीकृत एफआईआर के आधार पर डिटेल्स और प्रतिशत देता है। इसी वजह से दोनों के आंकड़ों में काफी अंतर नजर आता है, जबकि सच्चाई यह है कि पिछले साढ़े चार साल के एनसीआरबी के आंकड़ों को देखने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का ‘‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ’’ का वायदा भी वास्तव में जुमला ही साबित हुआ।

                कांग्रेस प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि साल 2020 के एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर 2 घंटे में एक रेप का मामला रिपोर्ट किया जाता है। जबकि बच्चों के खिलाफ रेप का मामला हर 90 मिनट में रिपोर्ट हुआ है। यह जानकारी राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार साल 2018 की तुलना में साल 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध सात फीसदी से ज्यादा बढ़े। एनसीआरबी के मुताबिक साल 2018 में उत्तर प्रदेश में रेप पर कुल 4322 मामले दर्ज हुए थे। देशभर में 2018 की तुलना में 2019 में महिलाओं पर जितने अपराध हुए, उसमें उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में 2019 में महिलाओं पर ज़ुल्म-ज्यादती की लगभग 60 हज़ार घटनाएं हुईं, जो पूरे देश में महिलाओं के प्रति हुए कुल अपराधों का लगभग 15 प्रतिशत है। प्रदेश सरकार एनसीआरबी की रिपोर्टिंग को छिपाने या कितना भी अपने पक्ष में करने का प्रयास करें, विगत दो वर्षों  (2020 -21 ) के आपराधिक आंकड़ों के बढ़ते हुए क्रम और  प्रतिशत में है। दहेज और छेड़खानी के मामले में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति ज़्यादा ख़राब है। स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2019 में देश में लड़कियों, महिलाओं पर एसिड अटैक की कुल 150 घटनाएं हुईं, जिनमें से लगभग 50 से ज्यादा घटनाएं अकेले उत्तर प्रदेश में हुईं।

                 कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हाथरस में दलित समुदाय की लड़की से दबंग वर्ग के लड़कों द्वारा रेप, उसकी जीभ काट देने, रीढ़ व गर्दन की हड्डियों को तोड़ देने और मौत के बाद रेप पीड़िता की मां, पिता, परिजन व गांव वालों के विरोध के बावजूद हिंदू रीति-रिवाज को दरकिनार कर रात 2.30 बजे अंधेरे में रेप पीड़िता का दाह संस्कार करा देना, उत्तर प्रदेश पुलिस का सर्वाधिक क्रूरतम चरित्र प्रस्तुत कर चुका है। महिलाओं के प्रति उत्तर प्रदेश में दूसरी भी तमाम गंभीर क़िस्म की ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश को महिला सुरक्षा के मामलों में नाकाम होने के नाते  शर्मसार किया है। राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी) के आंकड़े भी यह गवाही देते हैं कि प्रदेश में महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होते हैं। विभिन्न घटनाओं में जैसे वर्तमान की घटना, गोरखपुर में पिता की पिटाई का वीडियो बना रही युवती के पेट में गोली मारी गयी, 5 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गयी। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के घोसी से सांसद अतुल राय पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता का मंगलवार की सुबह दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. पीड़िता और उसके एक साथी ने 16 अगस्त की सुबह सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह कर लिया था। यूपी सरकार इन घटनाओं पर मौन है। आरोपियों का हौसले बुलंद है, महिलाओं के स्वाभिमान सम्मान को लगातार ठेस पहुच पहुँच रही है। आपके याद होगा कि  गोरखपुर के रतनपुर गांव की 17 साल की छात्रा ने छेड़खानी से तंग आकर रात में खुद को आग के हवाले कर दिया। उसकी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। वही लखीमपुर के ईसानगर थाना क्षेत्र की रहने वाली 13 साल बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई। उसका शव गन्ने के खेत से बरामद हुआ। बलरामपुर का चर्चित गैंगरेप, बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर उन्नाव रेप कांड के अलावा उन्नाव में ही एक नौ साल की बच्ची के साथ क्रूरतम तरीके से रेप किया गया. बच्ची के शरीर से इतना खून बहा कि अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया, जैसे मामले महिलाओं के साथ बेतहासा हो रही, आपराधिक वारदातों की प्रतिदिन मिल रही मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह स्पष्ट है कि योगी राज में यूपी पुलिस व प्रशासन ने मनमाना व ग़ैरक़ानूनी रवैया अपना रखा है। यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सामाजिक बदनामी के डर से ज्यादातर मामले दबा दिए जाते हैं और पुलिस तक नहीं पहुंच पाते।

             कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में भारत में रोजाना औसतन 87 दुष्कर्म के मामले सामने आए और महिलाओं के खिलाफ अपराध के चार लाख पांच हजार 861 मामले दर्ज किए गए। एनसीआरबी 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 2019 में हर दिन औसतन बलात्कार के 88 मामले सामने आए हैं। साल में बलात्कार के कुल 32,033 मामलों में से 11 प्रतिशत दलित समुदाय से संबंधित थे।

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