स्क्रब टाइफस को रोकने के लिए करें कारगर उपाय , जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी


ललितपुर। स्क्रब टाइफस नामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की गयी है। बताया गया है कि स्क्रब टाइफस एक रिकेटसिया सूसुगमुसी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी हैं जो कि सकमित खटमल, पिस्सू खून चूसने कीट के काटने से होता है। काटने के पश्चात यह कांटने की जहां पर लाल घेरे दार निशान बना देता हैं एवं कांटने के कुछ दिन पश्चात व्यक्ति को बीमारी शुरू हो जाती हैं। 
इसके लक्षण
अचानक ठण्ड के साथ बुखार, खांसी, पेट दर्द, उलटी, सिर दर्द, बदन दर्द, लसिका ग्रन्थियों में सूजन, मानसिक भ्रम, इन्सेफलाइटिस, प्लेट्स कम हो जाना, कांटने
की जगह पर गहरा काला एवं लाल खेर का निशान (इश्चर) बनना। गंभीर होने की दशा में एक अधिक अंगों की कार्य शिथिलता, निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ होना, अचानक ब्लड प्रेशर कम हो जाना एवं किडनी खराब हो जाने की समस्या हो ती है तथा ऐसी परिस्थितयों में मृत्यु दर (केस फैटेलिटी रेट) 10 प्रतिशत तक होती है।
इसका उपचार है
बुखार आने पर बुखार को कम करने वाली औषिधों को प्रयोग एवं चिकित्सक की सलाह पर आवश्यकतानुसार एंटीबायोटिक के उपयोग पश्चात स्क्रब टाइफस से जल्दी ठीक हुआ जा सकता हैं। मुख्य पर डोक्सीसाक्लीन एवं एजोथ्रोमाइसिन का प्रयोग स्क्रब टाइफस के उपचार हेतु प्रथम पंक्ति में चयन किया जाता है। अत: उक्त लक्षणों के प्रकट होने पर शिथिलता न बरते हुये तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक की सलाह से उपचार लेना चाहिये।
रोकथाम के लिए करें उपाय
उक्त स्क्रब टाइफस हेतु वैक्सीन का अविष्कार नहीं हुआ है। स्क्रब टाइफस से बचने हेतु संक्रमित खटमल, पिस्सू के संम्पर्क में न आने का हर संभव प्रयास करें। यात्रा करते समय अगर आप किसी ऐसी जगह यात्रा कर रहे है जहां स्क्रब टाइफस फैले होने की पुष्टि हुई है वहां पर आप अत्यधिक वनस्पति वाले क्षेत्रों में न जाये एवं झांडियों वाले क्षेत्रों में जाने से बचे। खेतों में काम करने वाले किसानो को रोडेन्स, जैसे चूहे इत्यादि के नियंत्रण हेतु आवश्यक उपाये अपनाये। खेतों में काम करने वाले किसानो को चप्पल व जूते का इस्तमाल करे एवं शारीरिक स्वच्छता अपनाते हुये शरीर में खटमल, पिस्सू व खून चूसने वाले कीटों के शरीर में चिपकने से बचायें। खेतो काम करते समय खाने पीने की वस्तुओं के अवशेष न छोड़ें जिससे कि स्क्रब टाइफस के वाहक जानवर जैसे चूहे, गिलहरी, नेवला, कवरबिज्जू आकर्षित न हो। अत्याधिक बनस्पति वाले क्षेत्रों व झांडियों में काम करने के पश्चात् सही से स्नान एवं कपड़ों को अच्छे से धोयें। जंगली जानवरों जो कि रकब टाइफस के वाहक हो सकते है जैसे चूहे, गिलहरी, नेबला, कबरबिज्जू से सुरक्षित दूरी बनाये रखे।

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