हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान - डॉ ओम प्रकाश शास्त्री

 



हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान -  डॉ ओम प्रकाश शास्त्री
नेहरू महाविद्यालय में हुई हिंदी दिवस पर विचार गोष्ठी
ललितपुरनेहरू महाविद्यालय, ललितपुर के संस्कृत सभागार में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया  जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अवधेश अग्रवाल ने की और उन्होंने कहा की हिंदी दिवस पूरे भारत में बहुत उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाता है। शिक्षण संस्थानों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सभी हमारी राष्ट्रभाषा को सम्मान देते हैं। हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी हुई है अगर हम अच्छी हिंदी का अनुकरण करेंगे तो निश्चित रूप से एक श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि हिंदी संस्कृत की पुत्री है आज के इस भौतिकता वादी युग में हिंदी का क्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है यह हमारे लिए प्रसन्नता और खुशी का विषय है। संस्कृत से हिंदी में जो भी आया है उसका संवर्धन किया जाना चाहिए। संस्कृत के साथ साथ हिंदी भी हमारे लिए वंदनीय है। इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ पंकज शर्मा ने कहा की हिन्दी विद्वानों द्वारा अपनी महान साहित्यिक कृतियों में प्रयोग की जाने वाली प्रमुख भाषा रही है।रामचरितमानस एक साहित्यिक कृति है जो हिंदी में भगवान राम की कहानी का वर्णन करती है और गोस्वामी तुलसीदास की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है, जिसे 16 वीं शताब्दी में लिखा गया था। हिंदी सबसे आदिम भाषाओं में से एक है जो मूल रूप से संस्कृत भाषा से संबंधित है। अतीत से, हिंदी एक भाषा के रूप में विकसित होकर हमारी राष्ट्रभाषा बन गई है। मनोवैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार शर्मा ने कहा  देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का फैसला किया था हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में संपूर्ण भारत में साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसका प्रभाव सभी छात्र छात्राओं पर सकारात्मक पड़ता है। हिंदी सरल, सुबोध, सुंदर अभिव्यक्ति का माध्यम है डीएवी कॉलेज उरई के हिंदी प्राध्यापक डॉ नीरज द्विवेदी ने कहा कि आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी को बधाई देता हूं और आपको बताना चाहता हूं कि आज मैं जहां पर ही हूं हिंदी की बदौलत हूं हमारे लिए यह सम्मान की बात है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे महत्वपूर्ण स्थान हासिल होता जा रहा है। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ सुधाकर उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 1949 में 14 सितंबर को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को नवगठित राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था इसके बाद वर्ष 1953 में पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया तब से निरंतर 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली तीसरी भाषा है यह हम हिंदुस्तानियों के लिए गौरव की बात है। वर्ष 2019और,2020 राजभाषा क्रियान्वयन वार्षिक कार्यक्रम को जब हम देखते हैं तो इसमें स्पष्ट उल्लेखित है कि सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की वेबसाइट हिंदी में होनी चाहिए इस पर विशेष बल दिया गया है। हिंदी प्राध्यापक डॉ ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे छात्र-छात्राओं में हिंदी के प्रति रुझान और सम्मान पैदा हो। इस अवसर पर क्रीडा विभाग अध्यक्ष डॉ अनिल सूर्यवंशी, डॉ हरीश चंद दीक्षित, डॉ रामकुमार रिछारिया, डॉ दीपक पाठक, डॉ सूबेदार यादव, डॉ सुभाष जैन, डॉ प्रीति सिरोठिया, डॉ अवनीश त्रिपाठी, डॉ जगत कौशिक डां बलराम द्विेदी, डॉ पराग कुमार, डॉ विनोद सिंह ,डॉ राजेश तिवारी ,डॉ उषा तिवारी ,वर्षा साहू, डॉ रिचा राज सक्सेना, कविता पैजवार, विवेक पाराशर, फहीम बख्श, ध्रुव किलेदार, राजीव गोस्वामी आदि उपस्थित रहे संचालन डॉ सुधाकर उपाध्याय ने किया एवं आभार डॉ ओपी चौधरी ने व्यक्त किया।

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