पुण्यतिथि पर हिन्दी के साहित्यकार हरिप्रसाद जैन को किया याद

 






ललितपुर। हिंदी दिवस के अवसर पर आपको जनपद ललितपुर के एक ऐसे महान हिंदी साहित्यकार जिनका जन्म आज के दिन हुआ था, जिनका नाम था हरिप्रसाद जैन। हरि प्रसाद जैन की जन्म स्थली पाली में है। आपने हिंदी साहित्य को ना केवल नई पहचान दी तो वहीं अपने खण्ड काव्य के माध्यम से समाज की व्यवस्थाओं के साथ-साथ विरह, श्रंगार व हास्य रचनाओं को गढक़र किये। उन्होंने बुंदेली साहित्य को भी अपनी लेखनी नई धार पहचान जो दी है। बचपन से ही आप साहित्य साधना करने लगे थे। प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद आजादी से पूर्व ही दे ललितपुर के मोहल्ला तालाबपुरा में अपनी कर्म स्थली बनाई और बही निवास बनाया। आपने हिन्दी की कई कविताये गजल लिखे थे। राजुल देवगढ रलावली उनके प्रकाशित खण्ड काब्य है। इसके अलावा तीर्थकर महावीर बुन्देली वियोगी नी विधवा उनके अप्रकाशत का व्यंग है। आपने कानपुर उप्र में कवि सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार जीता था, जहां दिग्गज कवि शामिल थे। यह जनपद के लिये उस समय गौरव की बात थी। भारत और चीन के युद्ध के समय बुंदेली भाषा में चीन चीन के वीन ले हम जितनी चपटी नाके लिखी थी। आज उनके पुत्र डा.जिनेन्द्र जैन ने बताया कविवर के बडे भाई गोविन्ददास जैन स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी रहे है। आप में अपने बड़े भाई की देश भक्ति का जज्बा भी देखते नहीं बनता और वह भी आजादी की लड़ाई में कूद गए लेकिन नाबालिग होने पर ब्रिटिश सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई न करते हुये उनको रिहा कर दिया था। सागर म.प्र. में तत्कालीन कुलपति आचार्य नंद दुलारे वाजपेई ने उन्हें सम्मानित किया था जो समकालीन कवि थे। हरिप्रसाद हरी के साहित्य पर अब तक कई छात्र-छात्राओं ने शोध करके पीएचडी कर चुके हैं। 14 सितंबर 1963 को कविवर ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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