कोरोना और आत्मा की शक्ति को पहचानो,तभी स्वास्थ्य और सफल हो सकते है : आचार्य निर्भय सागर


ललितपुर। नगर क्षेत्र के बाहुबली नगर स्थित श्री जैन मंदिर जी मे विराजमान वैज्ञानिक जैन संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ससंघ का विगत दिनों आगमन हुआ था,जो बाहुबली नगर की संतशाला में विराजमान है।आचार्य श्री के प्रतिदिन प्रात: 9:00 बजे मंगल प्रवचन हो रहे है उसी क्रम मे बुधवार को उन्होंने अपने उपदेश मे कहा कि आत्म शक्ति से मन की भक्ति को जो भी मानव प्रभू चरणों मे अर्पित कर्ता हैं वह सदैव स्वास्थ्य और सफल होता हैं वह कोरोना से भय मुक्त और शरीर स्वास्थ्य रह सकता हैं, प्रवचन सभा मैं महामारी कोरोना का पूरा ध्यान रखा जा रहा है ।एवं सभी नियमों का पालन भी किया जा रहा है। क्योंकि आचार्य श्री स्वयं एक वैज्ञानिक जैन संत हैं वे कोरोना एवं देश विदेश की सभी प्रकार की स्थितियों को जानते हैं ।कोरोना से बचने के उपाय भी बताते हैं ।आचार्य श्री  ने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि किश्ती बदलती हैं तो किनारे बदल जाते हैं नजरें बदलते हैं तो नजारे बदल जाते हैं ।अत: अपनी दृष्टि को बदलना चाहिए सृष्टि अपने आप बदल जाएगी। अपनी दृष्टि में निर्विकारपना लाना चाहिए। विकारमय दृष्टि परिवार देश और समाज के लिए घातक होती है।अनेकांत की दृष्टि सब समस्याओं का हल है ।अपनी दृष्टि में अनेकांत लाना चाहिए अपनी आत्मशक्ति को पहचानना चाहिए अपने आत्म गुणों को त्याग तपस्या से प्रगट करना चाहिएआत्मा में अनंत गुण एवं अनंत शक्ति है उसको उद्घाटित करने वाला आत्मा ही परमात्मा बन जाता है। आचार्य श्री ने कहा जन्म लेते समय तीर्थंकर बालक असीम शक्ति के धारी होते हैं। 12 मल्लमैं जितनी शक्ति होती है उतनी एक सांड में होती है। 10 सांड में जितनी शक्ति होती है उतनी एकभैसा में होती है। 10भैंसा में शक्ति होती है उतनी एक घोड़े में होती है । 500 घोडे में जितनी शक्ति होती है।  उतनी एक हाथी में होती है। 500 घोड़ी में जितनी शक्ति होती है। उतनी एक शेर में शक्ति होती है। 500 शेर में जितनी शक्ति होती है। उतनी एक कामदेव में होती है । 24 कामदेव में जितनी शक्ति होती है।  उतनी एक नारायण में होती है और नो नारायण में जितनी शक्ति होती है। उतनी एक चक्रवर्ती में होती है। 24 चक्रवर्ती नो नारायण 24 कामदेव आदि को मिलने पर जितनी शक्ति होती है उतनी शक्ति जन्मजात एक तीर्थंकर बालक में होती है । इसी वजह से तीर्थंकर बालक 1000 बड़े कलशों से हुये अभिषेक के जल को सहन कर देते हैं और कुछ नहीं होता है ।आचार्य श्री ने कहा सभी जीवो के प्रति मैत्री का भाव रखना चाहिए । अपने घर में आए हुए शत्रु से भी मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। पापी से नहीं पाप से घृणा करना चाहिए । आत्मा में अनंत गुण और अनंत शक्ति कर्म परमाणु की शक्ति से छुपी हुई है उसे तपस्या तपस्या व्रत नियम और योग ध्यान के माध्यम से उद्घाटित करना चाहिए यही भगवान महावीर स्वामी का उपदेश है ।जो अपनी आत्मा की शक्ति को और आत्मा को पहचान लेता है उसी दुनिया को जानने की जरूरत नहीं होती है उसके ज्ञान में सारी दुनिया झलक ने लगती है ।आदमी धन को चुरा सकता है धन कमाने की कला को नहीं आदमी - आदमी के तन को मिटा सकता है आत्मा को नहीं । देशसमाज परिवार एवं जीवन का विकाश  करना है तो किसी का अपमान मत करो बल्कि आत्मा में अपनापन । इधर रवि चुनगी पत्रकार ने बताया कि आचार्य श्री निर्भय सागर जी के प्रतिदिन सुबह मंगल प्रवचन जैन मंदिर बाहुबली नगर मे हो रहे हैं तो दोपहर 2:30 बजे जैनधर्म ग्रंथों का स्वाध्याय आचार्य श्री द्वारा कराया जाएगा एवं शाम को 6 बजे शंका समाधान किया जाएगा जिसका लाइव  प्रसारण यूट्यूब चैनल निर्भय वाणी पर प्रसारित किया जाता है। आचार्य श्री की प्रवचन सभा मे जैन समाज पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल,श्री जैन मंदिर प्रबधंक प्रकाश चंद्र सौरयां,निर्मल जैन खिरिया,पत्रकार रवि चुनगी संजय रसिया,डा देवेन्द्र जैन, प्रेम चंद्र चुनगी,अभिषेक,अभिनव डोलू सौरयां,आनंद चंदावली,अंतू जैन बंधा,रिषभ जैन लौरगुंवा,मनोज बबीना,रिषभ सहारा,अभय जैन कैलगुवां,विजय जैन डिब्बा,हरीश चंद्र मिर्चवारा,राकेश बंट,आनंद खिरिया,संजीव सौरयां,अभिनव रसिया,प्रभात दाऊ आदि रहे।

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