100 दिनों में 1.40 लाख बालिकाओं को किया गया मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित- श्रीमती बेबी रानी मौर्य


लखनऊ: 07 जुलाई 2022
महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य द्वारा 100 दिवसों की उपलब्धियों पर की गई प्रेस वार्ता में कहा कि          100 दिनों में 1.40 लाख बालिकाओं को किया गया मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित। 50 हजार नवीन पात्र महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन योजना से जोड़ा गया। इस प्रकार कुल 31.50 लाख महिलाएं लाभान्वित। महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए वन स्टॉप सेन्टर और महिला शक्ति केन्द्र का हुआ कन्वर्जेन्स। योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित किये जाने हेतु हर 15 दिन में प्रत्येक विकास खण्ड पर स्वावलंबन कैम्प। प्रधानमंत्री के डिजिटल इण्डिया अभियान को आगे बढ़ाने एवं प्रभावी पर्यवेक्षण व पारदर्शिता के लिए विभाग द्वारा उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एवं मिशन वात्सल्य योजना के वेब पोर्टल का निर्माण व संचालन प्रारम्भ। जनपद शाहजहांपुर में नवीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का संचालन प्रारम्भ।
ऽ       प्रदेश में बालिकाओं की स्वास्थ्य, शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ करने, लिंगानुपात के संकेतकों में सुधार करने और प्रदेश में बालिकाओं के जन्म के प्रति आम-जन में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से 2019 में शुरू की गई महत्वकांक्षी, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में विभाग द्वारा 100 दिवसों के अंतर्गत 1.40 लाख नवीन पात्र बालिकाआंे को जोड़ा गया तथा उनके खातों में लाभ की धनराशि भी अंतरित कर दी गई। विभाग द्वारा निरंतर योजना के अंतर्गत लक्ष्य निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से लाभार्थियों को जोड़ने हेतु प्रयास किये गये जिसके परिणामस्वरूप योजना के अंतर्गत मात्र 3 वर्षों में कुल 12.97 लाख बालिकाओं को इस योजना का लाभ दिया गया है।
ऽ       विभाग द्वारा नई सरकार के गठन के साथ ही अप्रैल से जून के मध्य 100 दिवसों में किये जाने वाले कार्यों को नियोजित रूप में करने हेतु लक्ष्य निर्धारित किये गये थे और हमारा उदद्ेश्य था कि हम ऐसे लक्ष्य बनायें जो लाभार्थियों को सीधे तौर पर लाभान्वित करें। उन्होंनें विभाग के अधिकारियों को बधाई देते हुये खुशी जताई कि सभी लक्ष्यों को समय से पहले ही प्राप्त भी कर लिया गया।
ऽ       सरकार महिलाओं के मुदद्ों के प्रति संवेदित है और विपरीत परिस्थितियों में जीवनयापन कर रही महिलाओं का हर संभव सहायता पहंॅचाने हेतु प्रयासरत् है। विभाग द्वारा मात्र 3 माहों में 50 हजार ऐसी महिलाओं को चिन्हित किया जो 18 वर्ष से उपर की है और किन्हीं कारणों से अपने पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला की श्रेणी में हैं, ऐसी सभी महिलाओं को पेंशन देनेेे की कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है। मा0 मंत्री जी ने कहा इस योजना वर्ष 2016-17 में लाभार्थी महिलाओं की संख्या 17.31 लाख थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़कर अब 31.50 लाख हो गई है। अधिक से अधिक पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने हेतु लाभार्थी की वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 02 लाख रूपये किया तथा आयु की अधिकतम सीमा को समाप्त किया गया, जिसके फलस्वरूप हमारी सरकार के कार्यकाल में 14.19 लाख नवीन महिलाओं को जोड़ा गया है। योजना के अंतर्गत पेंशन की धनराशि को 500 से बढ़ाकर 1000 रू0/- प्रतिमाह किया गया। यह सरकार की महिलाओं के कल्याण हेतु प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ऽ       सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित हुये बच्चों को बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि में आर्थिक सहयोग हेतु उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) और उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) शुरू की गई जिसके अंतर्गत क्रमशः 11049 बच्चों को 4000 रू0 प्रतिमाह और 5284 बच्चों 2500 रू0 प्रतिमाह आर्थिक सहायता सहित उनकी पैत्रक सम्पत्ति की सुरक्षा, उन्हें प्रशिक्षित विशेषज्ञों के माध्यम से ट्रामा काउंसिलिंग आदि सुविधायें प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त कक्षा-9 या उससे ऊपर की कक्षाओं में अध्ययनरत 1060 बच्चों को लैपटॉप वितरण किया गया।
ऽ       विभागीय योजनाओं को अंतिम पायदान पर जीवनयापन करने वाले परिवार तक पहुंॅचाने हेतु विभाग द्वारा समस्त जनपदों मे प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर 15-15 दिवसों में स्वावलंबन कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प के माध्यम से भी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के 17,596, पति की मृत्युपरांत निराश्रित महिला पेंशन योजना के 7,972 , उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 760 और उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य के 1,725 नवीन आवेदन कराते हुए लाभान्वित करने की कार्यवाही की गयी है। विभाग द्वारा राज्य तथा मंडल स्तर पर ‘‘जागरूक‘‘ मीडिया कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। इस क्रम में लखनऊ में राज्य स्तरीय तथा तथा अन्य मंडलों (बस्ती मंडल को छोड़कर) में मंडल स्तरीय मीडिया कार्यशालायें आयोजित की गई हैं। विभाग द्वारा इन कार्यशालाओं के माध्यम से विभागीय योजनाओं तथा मिशन शक्ति की उपलब्धियों, को मीडिया के साथ साझा कर उन्हें जन-जन तक इन योजनाओं को पहुंॅचाने हेतु सक्रिय व संवेदित किया गया है।
ऽ       विभाग द्वारा लैंगिक तथा घरेलू हिंसा या अन्य मुदद्ों से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को संरक्षण तथा समर्थन देने हेतु संचालित की जा रही वन स्टॉप सेन्टर और महिला शक्ति केन्द्र योजना का अप्रैल माह में कन्वर्जेन्स किया गया जिससे पीड़ित महिलाओं को अल्प प्रवास (पाँच दिवस), चिकित्सकीय सहायता, परामर्शी सेवायें, विधिक व पुलिस सहायता प्रदान करने के साथ-साथ विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
ऽ       विभाग किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम 2015, क्रियान्वयन हेतु नोडल विभाग है। 100 दिवसों के भीतर ही विभाग द्वारा अधिनियम के अंतर्गत गठित किशोर न्याय बोर्ड तथा बाल कल्याण समितियों में नवनियुक्त 525 सदस्यों के प्रशिक्षण का लक्ष्य भी पूर्ण कर लिया गया है। 18 वर्ष से कम आयु के समस्त बच्चों के संरक्षण, देखभाल, पुनर्वासन आदि में बाल कल्याण समिति तथा किशोर न्याय बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विभाग द्वारा न सिर्फ उन्हें प्रशिक्षित किया गया बल्कि उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की निगरानी तथा प्रदेश के गृहों में आवासित महिलाओं तथा बच्चों के प्रकरणों में उनके पुर्नवास हेतु की गई कार्यवाही की निगरानी हेतु एम0आई0एस0 पोर्टल विकसित किया गया है।
ऽ       विभाग द्वारा उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य) पारदर्शी संचालन व नियमित समीक्षा हेतु भी एम0आई0एस0 पोर्टल तैयार करा लिया गया है। विभाग द्वारा जून माह में जनपद शांहजहांपुर के नवीन भवन में 50 बच्चों की क्षमता के राजकीय सम्प्रेक्षण गृह का निर्माण कार्य पूर्ण कराकर संचालन शुरू करा लिया गया है, वर्तमान में संस्था में 49 किशोर आवासित हैं। राजकीय सम्प्रेक्षण गृह में कानून से संघर्षरत् 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को आवासित किया जाता है।
ऽ       बच्चों के जीवन के प्रारंभिक वर्षों में गुणवत्तापूर्ण देख-भाल और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी 03-06 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये ई0सी0सी0ई0 को महत्व देते हुये स्कूली शिक्षा के बुनियादी स्तर में इसे सम्मिलित किया गया है। ऑगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से 03-06 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रारंभिक बाल्यावस्था में देख-भाल और शिक्षा के दृष्टिगत इन बच्चों में सर्वांगीण विकास के लिए ई.सी.सी.ई. गतिविधियां अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र के 03-06 वर्ष के बच्चों को खेल-खेल में शाला-पूर्व शिक्षा प्रदान की जाती है। बच्चों के लिए शाला-पूर्व शिक्षा को रुचिकर व सरल बनाने के लिए प्री-स्कूल किट के रुप में प्लास्टिक के बिल्डिंग ब्लाक, पज़ल, चित्र फ्लैश कार्ड, स्लेट, हिन्दी व अंग्रेजी अक्षर चार्ट आदि उपलब्ध कराया जाता है। ई.सी.सी.ई. के सुदृढ़ीकरण हेतु विभाग द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विगत वर्षों में समस्त ऑगनबाडी कार्यकत्रियों को ई0सी0सी0ई0 गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया है।
ऽ       उपलब्धि - वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश के 31 जनपदों में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 03-06 वर्ष के बच्चों हेतु प्री-स्कूल किट क्रय के लिए जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश एवं निदेशालय पत्र दिनॉक 22.06.2022 द्वारा कुल धनराशि रु0 1523.33 लाख आवंटित कियेे जाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। शेष 44 जनपदों में विगत वर्ष मंे ही प्री-स्कूल किट क्रय की कार्यवाही पूर्ण है।
ऽ        विभाग द्वारा ई.सी.सी.ई. के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मासिक थीम आधारित वार्षिक गतिविधि कैलेण्डर विकसित किया है। इन निर्धारित गतिविधियों के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों हेतु सहायक सामग्री के रुप मंे ’’पहल पुस्तिका’’ भी विकसित करते हुए उपलब्ध करायी गयी है। बच्चों को कहानी के माध्यम से शिक्षा प्रदान किये जाने के उद्देश्य से समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ‘‘नेशनल बुक ट्रस्ट‘‘ द्वारा प्रकाशित कहानी की 06 किताबें उपलब्ध करायी गयी हैं। बच्चों को खेल-खेल में गतिविधियां कराने के लिए ‘‘कम लागत-बिना लागत’’ पुस्तिका भी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सहायता के लिए उपलब्ध करायी गयी है। ई.सी.सी.ई सामग्री के रुप में वार्षिक गतिविधि कैलेण्डर, बाल गतिविधि पुस्तिका, टी.एल.एम हेतु पुस्तिका एवं बाल्य मूल्यांकन कार्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त विभागीय यू-ट्यूब चैनल पर ई.सी.सी.ई. सम्बन्धी विभिन्न गतिविधियों पर आधारित वीडियो एवं आडियो सामग्री उपलब्ध है।
ऽ       उपलब्धि - वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश के 42 जनपदों में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 03-06 वर्ष के बच्चों हेतु ई.सी.सी.ई सामग्री क्रय के लिए जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश एवं निदेशालय पत्र दिनॉक 22.06.2022 द्वारा कुल धनराशि रु0 482.11 लाख आवंटित कियेे जाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। शेष 33 जनपदों में पूर्व से ही ई.सी.सी.ई सामग्री क्रय की कार्यवाही पूर्ण है।
ऽ        समुदाय में पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी गतिविधियों के संचालन हेतु आंगनबाड़ी केन्द्र एक महत्वपूर्ण इकाई है, जहॉ पर बच्चों एवं महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी सेवाएं उपलब्ध करायी जाती हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आधारभूत सुविधाओं से युक्त आंगनबाड़ी केन्द्र के विभागीय भवन का होना आवश्यक है। नवीन शिक्षा नीति-2020 के दृष्टिगत आंगनबाड़ी केन्द्रों के भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों के प्रंागण में कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्र भवन का निर्माण मनरेगा, पंचायतीराज तथा आई.सी.डी.एस. के द्वारा कन्वर्जेन्स के माध्यम से कराया जाता है। भारत सरकार द्वारा एक आंगनबाड़ी केन्द्र भवन निर्माण हेतु अधिकतम लागत रु0 8.06 लाख निर्धारित है, जिसमें आई.सी.डी.एस. का अंश रु0 02.00 लाख, मनरेगा का अंश रु0 5.00 लाख की सीमा तक तथा पंचायतीराज रु0 1.06 लाख सम्मिलित है।
ऽ        वर्ष 2017 से माह जून, 2022 तक कुल 9,876 आंगनबाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण पूर्ण किया गया है तथा 1092 आंगनबाड़ी केन्द्र भवन निर्माणाधीन है। वर्ष 2017-18 में शासकीय/ विभागीय भवन के अभाव में 22 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्र किराये के भवनों में संचालित थे। उक्तानुसार निर्माण के फलस्वरुप वर्तमान में किराये पर संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या 12,860 है।
ऽ       उपलब्धि - 17 जनपदों के 199 आंगनबाड़ी केन्द्र भवनों के शिलान्यास हेतु निदेशालय पत्र दिनांक-06.06.2022 द्वारा जनपदों को धनराशि रु0 99.50 लाख अवमुक्त की गयी है। लोकार्पण हेतु 31 जनपदों के 150 आंगनबाड़ी केन्द्रों के भवनों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका हैं।
ऽ       पोषण स्तर में सुधार का पहला कदम कुपोषण का सही चिन्हांकन है। इस हेतु बच्चे, किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के वजन/लम्बाई की निगरानी की जाती है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के लाभार्थियों के वृद्धि निगरानी हेतु कुल 04 प्रकार के वृद्धि निगरानी उपकरण उपयोग में लाये जाते हैं। भारत सरकार द्वारा पोषण अभियान के अन्तर्गत ग्रोथ मानिटारिंग डिवाईसेस आंगनबाड़ी केन्द्रों पर उपलब्ध कराये जाने के निर्देशानुसार क्रय की कार्यवाही की गयी है। लाभार्थियों के पोषण स्तर के सही चिन्हांकन तथा नियमित वृद्धि निगरानी हेतु प्रदेश में पहली बार समस्त 75 जिलों के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से 1,88,219 स्टेडियोमीटर (02 वर्ष के ऊपर के बच्चों की ऊंचाई मापने हेतु), 1,52,432 इन्फेन्ट वेईंग स्केल (02 वर्ष तक के बच्चों का वजन मापने हेतु) तथा 1,87,919 इन्फेन्टोमीटर (02 वर्ष से कम के बच्चों की लम्बाई मापने हेतु) मशीनें समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर उपलब्ध करा दी गई है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरुप इन उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार की संस्था सी-पेट से तकनीकी प्री-डिस्पैच निरीक्षण के उपरान्त ही जनपदों में आपूर्ति की गयी है।
ऽ        पूर्व में प्रदेश के समस्त 75 जिलों के लिए स्टेडियोमीटर, इन्फेन्ट वेईंग स्केल तथा इन्फेन्टोमीटर का क्रय कर समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर तीन प्रकार के जी.एम.डी. उपलब्ध करा दी गई हैं।
ऽ       उपलब्धि - वर्तमान वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश के समस्त जनपदों हेतु लक्षित 1,40,235 मदर कम चाईल्ड वेईंग मशीन (महिलाओं एवं बच्चों के वजन मापने हेतु) का जेम पोर्टल के माध्यम से क्रय कर भारत सरकार की संस्था राईट्स से तकनीकी प्री-डिस्पैच निरीक्षण उपरान्त समस्त जनपदो में आपूर्ति की जा चुकी है तथा वितरण की कार्यवाही प्रचलन में है।
ऽ         आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की कार्यक्षमता में वृद्धि, पोषण एवं स्वास्थ्य के सम्बन्ध में ज्ञानवर्धन एवं गृह भ्रमण के दौरान लाभार्थियों को पोषण सम्बन्धी परामर्श में गुणवत्ता लाने के लिए विभाग द्वारा एक पुस्तिका के रुप में ‘‘पोषण मैनुअल’’ विकसित किया गया है।
ऽ       उपलब्धि - वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश के समस्त जनपदों में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 03-06 वर्ष के बच्चों हेतु जेम पोर्टल के माध्यम से पोषण मैनुअल क्रय के लिए जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश एवं निदेशालय पत्र दिनॉक 22.06.2022 द्वारा कुल धनराशि रु0 265.65 लाख आवंटित कियेे जाने की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है।
ऽ        बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने, आंगनबाड़ी केन्द्र भवनों में आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा ई.सी.सी.ई के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से मा0 जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारीगणों द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेते हुए ‘आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र’ के रूप में विकसित किया जाना है। इस हेतु गोद लेने वाले मा. जन-प्रतिनिधिगण तथा अधिकारियों द्वारा नियमित रुप से स्थलीय निरीक्षण करते हुए केन्द्र की समीक्षा की जायेगी तथा अर्न्तविभागीय समन्वय के माध्यम से केन्द्र एवं लाभार्थियों को सेवाओं से संतृप्त करते हुए आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र के रुप में विकसित किया जायेगा।
ऽ        उपलब्धि - शासनादेश दिनांक 10.05.2022 के क्रम में मा0 जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारीगणों द्वारा प्रदेश में 8343 आंगनबाड़ी केन्द्रों को गोद लेते हुए ‘आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र’ के रूप में विकसित करने के लिए औपचारिक आरम्भ किया जा चुका है।
ऽ       विभाग के कार्यक्रमों के समबन्ध में जन-जागरुकता तथा लाभार्थियों व उनके अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाने हेतु गोदभराई, अन्नप्राशन, वॉश-डे व सुपोषण दिवस की वित्त पोषित गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर विभिन्न गतिविधियों में से प्रत्येक माह 02 वित्त पोषित गतिविधियों का आयोजन मासिक कैलेण्डर के अनुसार किया जाता है। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी केन्द्र पर गैर-वित्त पोषित समुदाय आधारित गतिविधियां यथा-वजन दिवस तथा किशोरी दिवस का भी आयोजन किया जाता है। वर्ष 2021-22 में आई0ई0सी0 गतिविधियों हेतु जनपदों को प्रति परियोजना धनराशि रु0 200 लाख आवंटित की गयी थी।
ऽ       उपलब्धि - प्रदेश के समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मासिक कैलेण्डर के अनुसार गतिविधियांे का आयोजन नियमित रुप से किया जा रहा है।

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