वर्ष 2021-22 में प्रदेश का मत्स्य उत्पादन 8.09 लाख मीट्रिक टन रहा -डा0 संजय कुमार निषाद


 मत्स्य विभाग के निर्धारित लक्ष्यों को 100 दिन के अंदर शत-प्रतिशत पूर्ण किया गया



लखनऊ: 08 जुलाई, 2022
उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री डा0 संजय कुमार निषाद ने आज लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में मत्स्य विभाग की उपलब्धियॉ गिनाते हुए प्रेस प्रतिनिधियों को बताया कि मत्स्य विभाग ने 100 दिनों के निर्धारित लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया है।
डा0 निषाद ने बताया कि प्रदेश में मत्स्य विकास हेतु पर्याप्त जल संसाधन की उपलब्धता है, जिसका उपभोग कर मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ इस कार्यक्रम में परम्परागत रूप से जुड़े व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु मत्स्य विभाग, उ0प्र0 सक्रिय है। प्रदेश में 2020-21 में मत्स्य उत्पादन का स्तर 7.46 लाख मीट्रिक टन रहा है जो लैण्डलाक्ड प्रदेशों में प्रथम स्थान तथा अन्तर्स्थलीय प्रदेशों में तीसरा स्थान है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश का मत्स्य उत्पादन स्तर 8.09 लाख मीट्रिक टन रहा।
मत्स्य विकास मंत्री ने कहा कि मत्स्य विभाग द्वारा नदियों में रिवर रैंच्ंिाग कार्यक्रम के अन्तर्गत 100 दिनों हेतु निर्धारित लक्ष्य 5.00 लाख मत्स्य अंगुलिका संचय के सापेक्ष प्रदेश के 12 जनपदों यथा बिजनौर, अमरोहा, बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, कानपुर नगर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशाम्बी, मीरजापुर, वाराणसी एवं गाजीपुर में गंगाजी नदी में कुल 5.20 लाख मत्स्य बीज अंगुलिका का संचय किया गया। निर्धारित मानक के अनुसार मत्स्य बीज अंगुलिका एन0बी0एफ0जी0आर0 एवं निजी क्षेत्र की हैचरियों से क्रय कर संचय कराया गया।
डा0 संजय निषाद ने कहा कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ मत्स्य पालकों के आय में वृद्धि हेतु उन्हें गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज आपूर्ति कार्यक्रम के अन्तर्गत 100 दिनों में 2064.00 लाख मत्स्य बीज वितरण के लक्ष्य के सापेक्ष 2606.11 लाख गुणवत्तायुक्त रोहू, कतला, नैन, कामनकार्प, ग्रासकार्प, सिल्वर कार्प एवं पंगेशियस प्रजातियों का मत्स्य बीज मत्स्य पालकों को वितरित किया गया।  
 मत्स्य विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश में तालाबों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि लाये जाने हेतु विगत 100 दिनों में मृदा एवं जल के नमूनों के विश्लेषण हेतु निर्धारित लक्ष्य 3950 नमनों के सापेक्ष 4739 नमूनों का विश्लेषण किया गया जो लक्ष्य के सापेक्ष 121 प्रतिशत है।
डा0 निषाद ने कहा कि प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2022-23 में मत्स्य पालन हेतु नवीन जलक्षेत्र का आच्छादन विगत 100 दिनों में निर्धारित लक्ष्य 750.00 हे0 के सापेक्ष 1076.01 हे0 किया गया है, जो लक्ष्य के सापेक्ष 143.46 प्रतिशत है। मा0 प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से जल संरक्षण हेतु देश में अमृत सरोवर योजना संचालित है जिसमें सामुदायिक एवं निजी क्षेत्र के तालाबों का निर्माण/जीर्णोद्धार किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा माह फरवरी, 2019 से कृषकों की भांति मत्स्य पालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना प्रारम्भ की गयी। प्रदेश में अब तक कुल 10646 प्रस्तावों को स्वीकृत कराया गया है।
मत्स्य विकास मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार के लोक संकल्प पत्र के क्रम में निषादराज बोट सब्सिडी योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना स्वीकृत की गयी है। जिसे मछुआ समुदाय एवं मत्स्य पालकों के उत्थान हेतु राज्य सेक्टर की नयी योजना के रूप में लागू किया गया है। योजना में नाव एवं जाल की इकाई लागत रू0 0.67 लाख पर 40 प्रतिशत अनुदान ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले मछुआ समुदाय के ग्राम सभा के तालाबों के पट्टा धारकों/मछुआरों को नाव एवं जाल क्रय हेतु आर्थिक सहायता के रूप में देय है।
ग्राम सभा के तालाबों के मत्स्य पट्टा धारकों हेतु नयी श्मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनाश् लागू की गयी है। योजनान्तर्गत वर्ष 2022-23 हेतु राज्य सरकार द्वारा रु0 2.00 करोड़ बजट का प्राविधान किया जा चुका है। योजनान्तर्गत निम्नानुसार दो परियोजनायें संचालित की गयी हैं:-
(1) मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से सुधारे गये तालाबों में प्रथम वर्ष निवेश पर अनुदान की योजना:- योजनान्तर्गत मनरेगा योजना से सुधारे गये ग्राम सभा के पट्टे के तालाबों के पट्टाधारकों को मत्स्य पालन का कार्य किये जाने हेतु प्रथम वर्ष निवेश इकाई लागत रु0 4.00 लाख प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान देय है, इस योजना से तालाब के मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि होने के साथ-साथ पट्टेधारकों की आय में वृद्धि होगी एवं उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। इस योजनान्तर्गत प्रदेश में वर्ष 2022-23 के बजट प्राविधान के सापेक्ष 100 हेक्टेयर तालाबों को आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है।  
(2) मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से सुधारे गये तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना की योजना:- मत्स्य पालन कार्य में गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज एक महत्वपूर्ण निवेश है। जिसकी स्थानीय स्तर पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से ’’मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’’ के अन्तर्गत मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा के पट्टे के तालाबों में मत्स्य बीज बैंक स्थापना की योजना के अन्तर्गत प्रति हेक्टेयर इकाई लागत रु0 4.00 लाख पर 40 प्रतिशत अनुदान लाभार्थी को देय है। इस योजनान्तर्गत प्रदेश में वर्ष 2022-23 के बजट प्राविधान के सापेक्ष 25 हेक्टेयर तालाबों को आच्छादित किये जाने का लक्ष्य है।  
प्रेस वार्ता में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक डा0 सरोज एवं उपनिदेशक मत्स्य श्री पुनीत कुमार उपस्थित थे।

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