कला अभिरूचि, कला के उद्भव एवं विकास, कला वस्तुओं का संरक्षण जरूरी-विजय कुमार, पुलिस महानिदेशक, सी0बी0सी0आई0डी0

 

लखनऊ,राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आज दिनांक 18 दिसम्बर, 2022 को 10 दिवसीय कला अभिरूचि पाठ्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर ं मुख्य अतिथि के रूप में श्री विजय कुमार, पुलिस महानिदेशक, सी0बी0सी0आई0डी0, उ0प्र0 उपस्थित थे। निदेशक राज्य संग्रहालय, लखनऊ डॉ0 आनन्द कुमार सिंह ने पुष्प गुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन करती डॉ0 मीनाक्ष्ी खेमका ने कला अभिरूचि पाठ्यक्रम के विषय में बताया कि इस कार्यक्रम का प्रारम्भ 07 मई, 1993 में तत्कालीन निदेशक डॉ0 शिव दयाल त्रिवेदी द्वारा कराया गया था एवं तब से अनवरत् रूप से प्रतिवर्ष यह कार्यक्रम राज्य संग्रहालय, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है।    



इस कार्यक्रम का उद्देश्य कला के प्रति समाज के विभिन्न वर्गो में अभिरूचि जागृत करना एवं अपनी सांस्कृतिक धरोहरो के महत्व को समझना एवं कलाकृतियों को देखने के नजरिये में परिवर्तन करना है  क्योकि कला मानव की भाविभिव्यक्ति का सशक्त माध्यमह है। राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित होने वाले इस पाठ्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु किसी भी व्यवसाय अथवा शिक्षा से सम्बन्धित 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक प्रतिभाग कर सकते है। 


इस कार्यक्रम में लगभग 203 प्रतिभागियों ने आवेदन पत्र प्रस्तुत किये जिनमें से लगभग 100 प्रतिभागीं प्रतिदिन कार्यक्रम में उपस्थित रहे। पाठ्यक्रम में कला के विभिन्न आयामों से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर विषय विशेषज्ञों ने पॉवर प्वाइन्ट के माध्यम से सारगर्भित व्याख्यान दिये। जिनमें मुख्य रूप से कला अभिरूचि, कला के उद्भव एवं विकास, कला वस्तुओं का संरक्षण, लेखन कला, मुद्रा कला,  अन्तः जलीय पुरावशेष एवं पुरातत्व विषयों पर रूचिकर व्याख्यान दिये गये।


10 दिवसीय कला अभिरूचि पाठ्यक्रम में आयोजित व्याख्यानों में से विभिन्न प्रतिभाागयों द्वारा चयनित विषयों से सम्बन्धित संक्षिप्त निबन्ध प्रस्तुत किये गये। प्रतिभागियों से प्राप्त निबन्धों का मूल्याकंन चयन समिति द्वारा किया गया। जिसमें अरिदंम चतुर्वेदी, आकर्ष मिश्रा, सौम्या नामदेव तथा कंचन राजपूत को प्रोत्साहन पुरस्कार एवं एकांश अवस्थी को प्रथम पुरस्कार, पूजा वर्मा को द्वितीय पुरस्कार एवं विवेक विश्वकर्मा को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। कला अभिरूचि पाठ्यक्रम में उ0प्र0 के विभिन्न संग्रहालयों के अधिकारी तथा कर्मचारियों द्वारा भी प्रतिभाग किया गया। इस अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों में से कुछ प्रतिभागियों द्वारा कार्यक्रम के सम्बन्ध में अपने-अपने विचार व्यक्त किये गये। 


कार्यक्रम के अन्त में संग्रहालय के निदेशक डॉ0 आनन्द कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किया एवं बताया कि संग्रहालय द्वारा समय-समय पर विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों को आयोजन किया जाता रहा है। कला एवं ज्ञान को जनमानस में प्रचार-प्रसार के लिए इस प्रकार के पाठ्यक्रमो का आयोजन संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य है। डॉ0 मीनाक्षी खेमका ने मुख्य अतिथि, पत्रकार बन्धुओं, कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे प्रतिभागियों एवं समस्त संग्रहालय परिवार का धन्यवाद ज्ञापन किया। उक्त अवसर पूर्व सहायक निदेशक डॉ0 एस0एन0 उपाध्याय, श्री आई0पी0 पाण्डेय डॉ0 विनय कुमार सिंह, डॉ0 तृप्ति राय, शारदा प्रसाद त्रिपाठी, डॉ0 अनिता चौरसिया, धनन्जय कुमार राय, प्रमोद कुमार सिंह, शशिकला राय, शालिनी श्रीवास्तव, गायत्री गुप्ता, नीना मिश्रा एवं बृजेश यादव, परवेज, सुरेश कुमार, राजेश कुमार, सत्यपाल, अमित सिंह आदि उपस्थित रहे। 

------------------------------------------------------------------------------------------


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?