‘‘सचल पालना गृह योजना’’ घोटाले की भेंट चढ़ गई-कृष्ण्कांत पाण्डेय

लखनऊ, 16 जनवरी 2023। श्रमिकों के बच्चो के लिए शुरू हुई ‘‘सचल पालना गृह योजना’’ घोटाले की भेंट चढ़ गई। लगभग 6 वर्ष के अधिक हो गये सीबीआई अभी तक इस घोटाले की जांच कर रही है। घोटाले में लिप्त अफंसरों, कर्मियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी अभी तक नहीं दी गई। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता कृष्णकांत पाण्डेय ने आगे बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर सचल पालना गृह योजना में करोड़ो रूपये के हुए फर्जीवाडे़ की जांच शुरू हुई थी तथा सीबीआई ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर सम्बन्धित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मांगी थी, लेकिन अभी तक श्रमिकों के बच्चों का हक ड़कारने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार को सीबीआई को मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी नहीं दी गई। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने आगे कहा महिला कल्याण निदेशक व बोर्ड के प्रशासक के कई कर्मचारियों के खिलाफ भी मंजूरियां मांगी गई थी उन्हें भी मंजूरी नहीं दी गई। इस घोटाले में सैकड़ो स्वयं सेवी संस्थाओं की भूमिका भी संदिग्ध रही है जो जांच के घेरे में हैं तथा कई को ब्लैकलिस्टेड करने की भी सिफारिश की गई है, लेकिन सब लीपा पोती के दायरें में चल रहे हैं। प्रवक्ता कृष्ण्कांत पाण्डेय ने आगे कहा कि ज्ञात हो कि मजदूरों के बच्चों की देख भाल तथा शिक्षा के लिए सचल पालना गृह योजन की शुरूआत हुई थी जिसके तहत विशेष रूप से महिला श्रमिकों के कार्यस्थल के स्थान पर बच्चों को खेलने खाने और सोने की व्यवस्था होनी थी, जो उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में होनी थी जिसमें 6 साल तक के बच्चे पात्र थे। इसमें भी रजिस्टरों में बच्चों की मौजूदगी ज्यादा दिखाकर फर्जीवाड़ा किया जाना सामने आया। श्री पाण्डेय ने आगे बताया कि वर्ष 2013 में कांग्रेस की तत्कालीन केन्द्र सरकार के समय में यह योजना शुरू हुई थी जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को पहली किस्त के रूप में 68 करोड़ रूपये दिये गये थे। अंत में श्री पाण्डेय ने कहा कि सरकार द्वारा श्रमिकों के बच्चों का हक मारने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी न देना कहीं न कहीं अधिकारियों और कर्मियों को बचाने का कुप्रयास है। यह इस सरकार की मजदूर विरोधी मंशा को दर्शाता है।

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