78 वें अवतरण दिवस पर, विश्ववन्दनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज

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वीर, बुद्ध, विष्णु, योगेश्वर..
---------------- इंजिनियर अरुण कुमार जैन.
----------- जग को पल -पल देने वाले, इस युग के श्री राम,
वीर, बुद्ध, विष्णु, योगेश्वर शत-शत तुम्हें प्रणाम. अर्द्ध सदी से देते आये, संयम, तप, अनुराग,
दर्शन कर ही मिलता सबको, सदाचार विश्वास. हथकरधा से वंचित जन को स्वावलंबन सिखलाया,
सदाचार, सुख, शांति मन में, सदपथ चलना आया.
जेलों के कैदी भी हर्षित, ज्ञान, शांति, धन पाया, उनके आश्रित भी नतमस्तक, नव जीवन अब आया.
गोवंशो को गौशाला में, करुणा, जीवन मिलता, शुद्ध, सात्विक दुग्ध, औषधि का वर संग विकसता.
शांतिधारा, पूर्णायु ने नवआभा बिखरायी, पूर्ण स्वास्थ्य,आनंद,शांति की, सुरभि हमने पायी.
एक सहस्र जीवंत तीर्थ हैं, प्रेरक जन- जन मन को, समय,योग, प्रमाण,अभय,
प्रणम्य, वीर जीवन को. नव शशि,रवि प्रतिभास्थली से,
और सितारे प्यारे, बेटी को वरदान मिला है,
बढ़ती जाती आगे. सहस्रकूट,नंदीश्वर,चौबीसी,
इस वसुधा पर अब हैं, युगों-युगों तक तप,त्याग, साधना, के ये दृनसंबल हैं.
'मूकमाटी' से आकिंचन
माटी ने गौरव पाया, तृप्तिसुधा पा दिव्यशिखर पर,
स्वर्णकलश जो आया. शरदपूर्णिमा गौरवशाली,
अवतरणतिथि कहलायी, जिस वसुधा ने पदरज पायी, तीर्थ बनी मुस्कायी.
कर,पग,नयन, अधर सब देते, चितवन, वाणी देती,
विश्ववंद्य, युगदृष्टा, विद्यासागर की जय कहती. कोटि नमन,वंदन वसुधा के,
धरा, गगन, जलचर के, सत्य,अहिंसा, सदाचार से,
विश्व विजय जो करते.
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कोटिशः नमोस्तु पूज्य श्री ससंघ 🙏🏻

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