"वैश्विक परिवेश में हिन्दी का विकास एवं महत्व पर संगोष्ठी एवं एक शानदार कवि सम्मेलन " का आयोजन

 


मॉं वीणावादिनी की अनन्य कृपा से कल दिनांक 01 जनवरी 2024 अर्थात नववर्ष का प्रथम दिवस बहुत ही शानदार एवं विशेष उपलब्धियों भरा रहा जब हमने उत्तर प्रदेश सरकार के भारतीय भाषा महोत्सव के अन्तर्गत राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के तत्वाधान में दक्षिण भारत के बंगलुरु शहर में "वैश्विक परिवेश में हिन्दी का विकास एवं महत्व पर संगोष्ठी एवं एक शानदार कवि सम्मेलन " का आयोजन आरएमजेड गलेरिया रेजिडेंस , यलहंका के पार्टी रूम में किया ,जिसमें बेंगलुरु के ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुतियां दी । इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध  श्रेष्ठ साहित्यकार श्री ज्ञान चन्द मर्मज्ञ जी रहे  एवं अपने दोहों के लिए देश भर में विशिष्ट पहचान रखने वाली श्रेष्ठ कवयित्री श्रीमती गरिमा सक्सेना जी एवं स्थानीय  श्रेष्ठ कवयित्री आदरणीया श्रीमती भार्गवी रवीन्द्र जी ने विशिष्ट अतिथि द्वय के रूप में मंच को शोभायमान किया।  संस्थान की ओर से मैं डॉ शोभा दीक्षित "भावना" , कार्यक्रम अध्यक्ष, संयोजक एवं संचालक आदरणीय चंद्र देव दीक्षित जी एवं संगोष्ठी  के विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में आदरणीय श्री सुशील चंद श्रीवास्तव जी ने प्रतिभाग किया । कार्यक्रम  के शानदार संयोजन के लिए  श्री चन्द्र देव दीक्षित जी विशेष सराहना के पात्र हैं । यहॉं सुदूर प्रान्त में संस्थान का इतना भव्य कार्यक्रम उनके अथक प्रयास की परिणति है।  संगोष्ठी हेतु निर्धारित विषय पर संस्थान के बारे में  जानकारी प्रदान करते हुए  निर्धारित विषय पर अपनी विद्वत्ता पूर्ण तथ्यात्मक प्रस्तुति से सुशील चन्द्र श्रीवास्तव जी ने  कार्यक्रम में चार चॉंद लगा दिए । सभी  ने उनकी विषय विशेषज्ञता एवं प्रस्तुति की भूरि भूरि प्रशंसा की। सभी सम्माननीय कवियों ने हिन्दी की व्यापकता एवं वैश्विक महत्व एवं विकास हेतु निरन्तर प्रयास पर बल दिया। इस कार्यक्रम में लगभग 30 लोगों ने प्रतिभाग किया और 25 कवियों ने काव्य-पाठ किया। निरंतर 5 घंटों  तक चले इस कार्यक्रम में हॉल तालियों के मीठे स्वर से अविरल गुंजायमान रहा। संस्थान की व्यवस्थानुसार कार्यक्रम  में उपस्थित सभी कवियों में से 10 कवियों को अंगवस्त्र , मोमेंटो एवं सम्मान राशि देकर एवं  10 कवियों को अंगवस्त्र  देकर भी सम्मानित किया गया। संस्थान की पत्रिका अपरिहार्य को प्राप्त कर सभी कविगण इतने प्रसन्न हुए कि सबने उसके साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।  विशेष उपलब्धि यह रही कि इस कार्यक्रम में स्थानीय पत्रकार श्री अरुण कुमार झा की पत्रिका 'दृष्टिपात' का लोकार्पण भी हुआ। 

          मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से संस्थान की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए यह कहा कि दूसरे प्रांत में इतनी अधिक दूरी पर आकर हिन्दी के संवर्धन एवं प्रचार -प्रसार के लिए ऐसी अद्भुत संगोष्ठी और कवि सम्मेलन करना निश्चित रूप से बहुत ही सराहनीय है और वह अपने शहर की ओर से और कवि समाज की ओर से संस्थान एवं संस्थान के पदाधिकारियों का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करते हैं । इतना ही नहीं सभी उपस्थित कवियों ने संस्थान से निरंतर जुड़े रहने की जिज्ञासा व्यक्त की । सबने  संस्थान द्वारा किए जा रहे साहित्य संवर्धन एवं राज्य कर्मचारियों के उत्साहवर्धन के लिए किये जा कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से मेरे द्वारा जानकरी उपलब्ध करायें जाने पर संस्थान की प्रशंसा करते हुए प्रत्येक प्रांत में ऐसे संस्थान के होने की अनिवार्यता पर बल दिया। मेरे द्वारा यह अवगत कराने पर कि हम हिन्दीतर भाषा -भाषी अन्य प्रान्तों के दो राज्यकर्मी साहित्यकारों को हिन्दी भाषा में लिखित गद्य या पद्य की मौलिक कृतियों पर सम्मान एवं  रू.1,00,000-1,00,000/-  का नकद पुरस्कार भी देते हैं, उन सभी लोगों ने जोरदार तालियों से इसकी सराहना की और ऐसे अन्तरप्रान्तीय मूल लेखकों को संस्थान से जोड़ने में अपनी अभिरुचि प्रदर्शित की। मैं हृदय से अपने संस्थान के अध्यक्ष आदरणीय अखिलेश कुमार मिश्र जी एवं महामंत्री डॉ सीमा गुप्ता का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूॅं कि उन्होंने हमें यहां बेंगलुरु में यह कार्यक्रम करने का शुभ अवसर प्रदान किया । निश्चित ही ऐसे कार्यक्रम , ऐसे कदम हिन्दी के प्रचार-प्रसार के साथ -साथ संस्थान को ऊंचाइयों के नए शिखर तक ले जाने में कामयाब रहेंगें।


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