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युग पुरुष के रूप में याद किये जाएंगे कल्याण सिंह

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-        आदर्श स्वयंसेवक से सफल मुख्यमंत्री तक की यात्रा -       राम मन्दिर आंदोलन में सरकार गंवाने पर बने हिन्दुओं के चहेते -       मण्डल कमण्डल के बीच बनाई भाजपा के पिछड़े चेहरे की पहचान -सर्वेश कुमार सिंह- अयोध्या में विवादित ढांचे के नीचे रखीं भगवान श्रीराम की मूर्तियों को कोई ताकत हटा नहीं सकती है, तो फिर वहां मस्जिद के ढांचे की क्या आवश्यकता है ? हम इस  ढांचे को यहां से हटा देना चाहते हैं। दृढ़ता और संकल्प की शक्ति के साथ यह बात कहने का अदम्य साहस कल्याण सिंह में ही था। वह भी तब जब वे उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान थे। कल्याण सिंह ने यह बात राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार स्व. दिलीप अवस्थी से सितंबर 1991 में कही थी। जो समय देश की जानी मानी पत्रिका के राज्य में विशेष संवाददाता थे। उनके यह संकल्प व्यक्त करने के एक साल बाद ही छह दिसम्बर 1992 को वह विवादित ढांचा वहां से हटा दिया गया था। इसका मतलब साफ है कि कल्याण सिंह ने गर्भगृह पर ही श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिए परिकल्पना कर ली थी। सफल राजनेता, सफल मुख्यमंत्री, सफल विधायक, सफल पार्टी कार्यकर्ता, सफल शिक्षक और स

“झूठी माँ”

                          “झूठी माँ”               शिवराम का जन्म एक सरल संस्कारी और सम्पन्न परिवार में हुआ | बाल्यावस्था से होते हुए किशोरावस्था के मार्ग से युवावस्था को प्राप्त शिवराम का विवाह सुशीला से हुआ | नाम के गुण जन्म से ही सुशीला में थे | सुशीला स्वभाव से शीलवती, संस्कारी, पतिव्रता, कर्तव्यपरायण और अपनी मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा में जीवन जीती थी | शिवराम और सुशीला स्नेहपूर्वक रहते थे और उनको एक बेटा हुआ जिसका नाम भोला रखा | भोला माँ की गोद में स्वर्ग के सुख को पाता और पिता के लाड प्यार में जीवन की सुखानुभूति पाता था | भोला ७ वर्ष का हुआ और एकाएक उसकी माँ सुशीला चल बसी | सुखों का सूर्यास्त हुआ और दुखों ने पड़ाव डाला |            दिन बीते रातें बीती आयी काली रात |                     कालचक्र ने चक्र चलाया आयी अमावस रात ||      दुखों की ऐसी आंधी आयी मानो शिवराम और भोला अनाथ हो गए | कुछ पखवाड़े बीते और शिवराम ने भोला को माँ का प्यार मिले इसलिए फिर से विवाह किया और शिवराम पत्नी “मोहिनी” को घर लाया | भोला माँ कहता और माँ मानता परन्तु मोहिनी स्वभाव की कठोर, तेज तर्रार और क्र

डॉ. सुरेंद्र गम्भीर

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यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया से सेवा-निवृत्त प्राचार्य । अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ की भाषा समिति के भूतपूर्व अध्यक्ष। कैरिबियन देश गयाना, त्रिनिदाद, सूरिनाम, ग्वाडालूप, प्रशांत महासागर में फ़िजी, हिन्द महासागर में मारीशस, और अमेरिका में प्रवासी भारतीयों की भाषाओं के संरक्षण और ह्रास से संबंधित अनेक शोध-पत्रों का राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल, पुस्तकों और विश्वकोशों में प्रकाशन। भारत के राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत और सम्मानित ।

शार्दुला नोगा

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अपनी कविताओं और गीतों के लिए जानी जाती मूलतः मधुबनी बिहार की शार्दुला नोगजा कई अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ी जा चुकी हैं। प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में आप छपती रही हैं। हिंदी भाषा व साहित्य के विकास हेतु हिन्दी से प्यार है, साहित्यकार तिथिवार एवं कविताई सिंगापुर के माध्यम से सक्रिय हैं। वर्तमान में आप सिंगापुर में कार्यरत हैं।

अशोक भाटिया

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अम्बाला छावनी (पूर्व पंजाब) में जन्म, सेवा-निवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, लघुकथा, कविता, आलोचना, बाल साहित्य, व्यंग्य, ज्ञान साहित्य की लगभग बयालीस पुस्तकें। लघुकथा पर विशेष कार्य ।

संदीप व्यास

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उदयपुर (भारत) में जन्मे संदीप व्यास वतर्मान में न्यूजर्सी अमेरिका में रह रहे हैं। । आईटी विशेषज्ञ के रूप में कई संस्थानों से जुड़े संदीप छंद मुक्त कविताएँ लिखते हैं। उनकी कविताएँ कई प्रतिष्ठित ऑनलाइन पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वह न्यू जर्सी में शुरू की गई सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था 'झिलमिल' की कार्यकारिणी के सदस्य हैं

मनोज जैन 'मधुर'

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ग्राम बामौर कला, जिला शिवपुरी (मध्य प्रदेश) में जन्म भोपाल में निवास, सुप्रसिद्ध नवगीतकार, दो नवगीत संग्रह प्रकाशित, 'वागर्थ' फेसबुक समूह के माध्यम से नवगीत का प्रचार-प्रसार.

पूर्णिमा वर्मन

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साहित्य, संगीत, कला और दर्शन की अनेक विधाओं में सक्रिय, पूर्णिमा वर्मन का जन्म पीलीभीत, उ.प्र. में हुआ। वेब पर हिंदी की पहली व्यवस्थित पत्रिका के रूप में अभिव्यक्ति और अनुभूति का ऐतिहासिक महत्व है जिसका संपादन पूर्णिमा वर्मन शारजाह से करती रही हैं। नवगीत पर केन्द्रित कई बरसों से वे लखनऊ में वृहद आयोजन, करती आ रही हैं. पूर्णिमा जी के तीन कविता संग्रह प्रकाशित हैं, अनेक प्रवासी साहित्यिक संकलनों और पाठ्यक्रमों में उनकी रचनाएँ शामिल हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान सहित कई संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत/सम्मानित पूर्णिमा वर्मन ने 25 वर्षों तक शारजाह में रहने के बाद लखनऊ में साहित्यिक/सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की है।

मंजु मिश्रा

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ल खनऊ, भारत में जन्मी और वर्तमान में कैलिफोर्निया, अमेरिका में बसी मंजू मिश्रा का एक कविता संग्रह और देश-विदेश के कई साझा संकलनों में हाइकु, क्षणिका, मुक्तक प्रकाशित हैं। पेशे से प्रबंधन क्षेत्र में कार्यरत । कैलिफ़ोर्निया स्थित "विश्व हिंदी ज्योति" संस्था में हिंदी की सेवा में संलग्न ।