मृत्यु का आनंद

ललितनगरी के महाराज सारंगदेव अपने मंत्री की  ज्ञान चेतना से कुपित थे ।मंत्री को जन्म दिन समारोह  के दिन जब खुशी से सब झूम रहे थे तभी सैनिक राजा का सन्देश  लेकर पहुंचे और बोले आज शाम को मंत्री को फांसी दी जायेगी ।यह सुनकर समारोह में उदासी छा गयी, मित्र, सबंधी रोने लगे ।मंत्री समाचार सुनकर भी बैठे संगीत नृत्य का आनंद ले रहे थे ।ऐसा लगा जैसे कुछ सुना ही नहीं यह सोचकर सैनिको ने पुन: राजा का सन्देश सुनाया तो मंत्री ने सैनिको से कहा कि राजा को मेरी ओर से धन्यबाद देना कि कम से कम मृत्यु से पहले आनंद मनाने के लिए कई घंटे शेष है बता कर बड़ा उपकार किया है ।हम अब अपनी मौत पर खुशी मना सकते है ।यह सब कहकर मंत्री नाचने लगा ।सैनिक यह सब देखकर राजा शतरंग देव के पास पहुँचे । राजा ने पूछा -मंत्री का मौत का सन्देश सुनते क्या हाल था? सैनिको ने बताया कि सम्राट वह खुशी से झूम उठे और आप के लिए समय बताने के लिये धन्यवाद देने को कहा है ।

शारंग देव ने कल्पना तक नही की थी कि मौत की खबर पर कोई खुश हो सकता है ,वह सच जानने के लिए मंत्री के घर पहुंचे देखा मंत्री नाच रहा था,खुशी से गा रहा था ।राजा ने मंत्री से पूछा, आज शाम मौत है और तुम हंस रहे हो, गा रहे हो ।
मंत्री ने राजा को धन्यवाद दिया ।इतने आनंद से  मैं कभी भी भरा न था ।आपने बड़ी कृपया की मौत का समय बता कर ।मृत्यु का उत्सव मनाना आसान हो गया ।आपकी कृपा, आपका धन्यवाद ।राजा अवाक रह गया बोला जब तुम मौत से व्यथित ही नहीं इसलिए अब फासी देना बेकार है ।

 

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सुरेंद्र अग्निहोत्री

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