डाॅ. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ सम्मान समारोह, काव्य गोष्ठी एवं लोकार्पण समारोह


लखनऊ। आज दिनांक 23 अक्टूबर, 2019 को डाॅ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' जन्मशताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी के यशपाल सभागार में मुख्य अतिथि मा. श्री केशरीनाथ त्रिपाठी, महामहिम पूर्व राज्यपाल, पश्चिम बंगाल एवं वरिष्ठ कवि श्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में डाॅ0 शिवओम अम्बर को डाॅ0 लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' साहित्य सम्मान से समादृत करते हुए ग्यारह हजार रूपये की धनराशि, मानपत्र, स्मृति चिह्न उत्तरीय भंेट की गयी।
 इस अवसर पर वाणी वन्दना की प्रस्तुति श्री अतुल वाजपेयी द्वारा की गयी। मंचासीन अतिथियों का उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न द्वारा स्वागत श्री योगीन्द्र द्विवेदी द्वारा किया गया। कवियों का स्वागत डाॅ. आलोक मिश्र ने किया। डाॅ. निशंक संस्थान की उपाध्यक्ष प्रो. उषा सिन्हा ने स्वागत भाषण के अन्तर्गत संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। 
 अध्ययन संस्थान की ओर से प्रकाशित वार्षिक पत्रिका 'निशंक सुरभि' तथा श्री केशव प्रसाद वाजपेयी की पुस्तक 'रागाम्बरा' का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। 
 इस अवसर पर सम्मानित डाॅ0 शिवओम अम्बर ने कहा - आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से जिस तरह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने उर्मिला के चरित्र को रेखांकित किया, उसी तरह आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से डाॅ. लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' ने सुमित्रा जैसे उपेक्षित पात्र को महाकाव्य का विषय बनाया।
 डाॅ. सुरजीत सिंह डंग ने कहा - डाॅ. लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' अपने समय के ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने चरित्र-बल को सदैव आगे रखा। हिन्दी के स्वत्व की लड़ाई लड़ने का कार्य डाॅ. निशंक ने किया है।
 श्री गोपाल चतुर्वेदी ने कहा - डाॅ. निशंक जिस समय साहित्य-रचना कर रहे थे, उस समय लखनऊ उपन्यास का केन्द्र था। उस समय के अनेक बड़े उपन्यासकार लखनऊ में रह रहे थे, किन्तु उस दौर में डाॅ. निशंक ने कविता को आन्दोलन का रूप दिया। 'सुकवि विनोद' जैसी पत्रिका का दस वर्ष तक सम्पादन करके डाॅ0 निशंक ने कविता में छन्द की प्रतिष्ठा की। 
 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे मा. श्री केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा - जब मैं विधानसभा अध्यक्ष था, तब मेरा सम्पर्क डाॅ. लक्ष्मीशंकर मिश्र 'निशंक' से हुआ। पं. गजेन्द्र नाथ दीक्षित के साथ डाॅ. निशंक अवसर मेरे पास आया करते थे। इस तरह मैं सहज ही डाॅ. निशंक का स्नेहपात्र हो गया। डाॅ. निशंक का वाड्मय एक विशाल परिधि का सृजन करता है। हिन्दी, अवधी, ब्रजभाषा में समान रूप से अधिकारपूर्वक लेखनी चलाने का कार्य डाॅ. निशंक ने किया है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा - डाॅ. निशंक की कविताओं पर उनके चरित्र का बहुत बड़ा प्रभाव रहा है। मैं जहाँ सीधे-सीधे शिशु जी से छन्द की कला सीखी, वहीं डाॅ. निशंक के छन्दों का मुझ पर बहुत प्रभाव रहा है। 
इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें डाॅ. अमित अवस्थी द्वारा डाॅ. निशंक की कविताओं का पाठ किया गया। साथ डाॅ. जितेन्द्र कुमार सिंह 'संजय', श्री सरस कपूर, डाॅ. शिवओम अम्बर, श्री केशरी नाथ त्रिपाठी एवं श्री उदय प्रताप सिंह ने अपनी कविताआंे के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह का संचालन श्री पद्मकान्त शर्मा 'प्रभात' ने किया। 


 


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