‘भाजपा के झांसे में अब नहीं आने वाली हैं निषाद व अतिपिछड़ी जातियां-लौटन राम’

जय प्रकाश निषाद समाज के नहीं पार्टी के बन्धुआ सरीखे नेता
लखनऊ 13 जुलाई, 2020। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बेनी बाबू के देहावसान के बाद रिक्त राज्य सभा सीट के उप चुनाव से भाजपा द्वारा जय प्रकाश निषाद को उम्मीदवार बनाये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चै0 लौटन राम निषाद ने कहा कि जय प्रकाश निषाद/मछुआ समुदाय के नेता नहीं बल्कि भाजपा के बन्धुआ सरीखे निज स्वार्थ के लिए कार्य करने वाले नेता हैं। इन्होंने कहा कि जब ये बसपा से विधायक थे, उस समय मायावती सरकार द्वारा निषादों का अधिकार हनन किया गया तो यह गूंगे बहरे हो गये थे। वहीं भाजपा में आने के बाद भी निज स्वार्थ के लिए चुप्पी साधे रहे। ऐसे नेता समाज के नहीं बल्कि पार्टी के बन्धुआ मजदूर सरीखे नेता होते हैं। जिनसे समाज का कोई भला होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि एक नहीं 10 निषादों को भाजपा राज्य सभा या विधान परिषद में भेज दे, अब निषाद समुदाय की जातियां व अतिपिछड़ा वर्ग भजपा के झंासे में आने वाला नहीं है।
निषाद ने कहा कि श्रीराम-श्रीनिषाद राज की मित्रता व केवट की भक्ति का हवाला देकर भाजपा ने कई बार निषाद वोट बैंक  की ठगी किया है। लेकिन अब निषाद समाज भाजपा के छल कपट, झूठ फरेब व निषाद अतिपिछड़ा वर्ग विरोधी नीतियों को समझ गया है। प्रदेश में जब-जब भाजपा की सरकार बनी निषादों के अधिकारों को छीनने का ही काम किया गया। समाजवादी पार्टी की सरकार ने निषाद मछुआ, मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, धीमर, कहार, कश्यप, गोड़िया, तुरहा, बाथम, मांझी, रायकवार,  भर, राजभर, कुम्हार, प्रजापति आदि 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया। अखिलेश यादव की सरकार ने बकायदा अनुसूचित जाति में शामिल मझवार, तुरैहा, गोड़, शिल्पकार, पासी, तड़माली जाति को परिभाषित कर इनकी उपर्युक्त पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ देने का शासनादेश जारी किया। उच्च न्यायालय इलाहाबाद खण्ड पीठ प्रमाण-पत्र जारी करने का भी निर्देश दिया। योगी सरकार ने दो वर्षों तक निर्देश का अनुपालन न कर नये सिरे से शासनादेश जारी कर अपने ही कार्यकर्ता गोरख प्रसाद से स्टे करा दिया। इसके बाद योगी सरकार ने शासनादेश को वापस ही नहीं लिया। बल्कि सदैव के लिए निरस्त कर दिया। केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चन्द्र गहलौत ने भी आरक्षण मामले को सदैव के लिए बंद कर अतिपिछड़ी जातियों के साथ घोर अन्याय किया।
निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार ने 2013 मंे महाराज गुहराज निषाद व कश्यप )षि की जयन्ती के लिए 5 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। जिसे योगी सरकार ने खत्म कर निषाद समाज को अपमानित किया। ई-टेण्डरिंग की व्यवस्था लागू कर निषाद समाज के बालू मौरंग खनन जैसे परम्परागत पुश्तैनी पेशे को सामन्ती जातियों के हाथो नीलाम कर दिया। सपा सरकार ने मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देने के साथ मछुआ दुर्घटना बीमा की राशि 5 लाख रूपया किया था। जिसे योगी सरकार ने रद्द कर दिया। सपा सरकार ने लोहिया आवास योजना के पैटर्न पर मछुआ आवास योजना की धनराशि 3.05 लाख किया था। जिसे योगी सरकार ने खत्म कर निषाद समाज के साथ धोखा धड़ी किया। उन्होंने कहा कि मण्डल कमीशन विरोधी भाजपा कभी पिछड़ों अतिपिछड़ों की हितैशी नहीं हो सकती। भाजपा ने मध्य प्रदेश चुनाव में फूलन देवी के हत्यारे शेर सिंह राणा को स्टार प्रचारक बनाया था। निषाद समाज व अतिपछिड़ा वर्ग भाजपा की गद्दारी का बदला विधान सभा चुनाव-2022 में चुनाने के लिए इन्तेजार कर रहा है। भाजपा ने निषाद समाज का राजनीतिक अपमान करते हुए भाजपा से तीसरी बार जीते जय प्रकाश निषाद को राज्यमंत्री बनाया और सिंचाई मंत्री धर्म पाल सिंह को अपमानित कर कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया।


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