तीन युवाओं ने किया प्लाज्मा और पति- पत्नी ने ब्लड डोनेट किया

छह मई को निशुल्क एंटीबॉडी परीक्षण शिविर ललितपुर। आगरा में भर्ती ललितपुर के रमाकांत पाराशर के भाई 42 वर्षीय रजनीश पाराशर जोकि कारपोरेशन बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात है। 15 दिन पूर्व कोरोना से पीडि़त होने पर यशवंत ट्रामा सेंटर में भर्ती हुए वहां पर डॉक्टरों ने प्लाज्मा की आवश्यकता बताई, जिस पर उनके भाई रमाकांत पाराशर ने अन्नपूर्णा सेवा संघ को अवगत कराया। संस्था के सदस्य प्रिंस जैन ने रजनीश पाराशर को झांसी में प्लाज्मा डोनेट किया। झांसी में बी पॉजिटिव प्लाज्मा की आवश्यकता ललितपुर के मरीज लक्ष्मी देवी यादव पटौरा रोड, जगपुरा निवासी को हुई जिसकी जानकारी मिली, जिस पर मनोज जैन रंगमहल से वार्ता की जिस उन्होंने अबिलम्ब झांसी जाकर लक्ष्मी देवी को दो यूनिट प्लाज्मा डोनेट किया। दूरसंचार विभाग के सुशील हरायण झांसी में भर्ती होने पर डॉक्टरों ने उन्हें ए पॉजिटिव प्लाज्मा की आवश्यकता बताई उनके पुत्र विवेक हरायण ने ललितपुर में अपने चचेरे भाई पत्रकार संजय ताम्रकार से सम्पर्क किया। उन्होंने संस्था से संपर्क कर प्लाज्मा की आवश्यकता बताने पर सदस्य अंकुर जैन ने अबिलंब झांसी आकर कोरोना से जूझ रहे सुशील को दो यूनिट प्लाज्मा डोनेट कर लोगों से अपील की कि वह भी लोगों की जान बचाने में सहयोग करे। वहीं जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा.राजेंद्र प्रसाद की सुपुत्री कु.तरुषा प्रसाद को 4 ग्राम हिमोग्लोबिन होने के कारण खून की आवश्यकता थी। जिस पर उन्होंने अन्नपूर्णा सेवा संघ से संपर्क किया। सहमंत्री भाई हरिश्चंद्र नामदेव और उनकी पत्नी अंजना नामदेव दोनों का ब्लड ग्रुप बी.पॉजिटिव होने के कारण एक साथ दोनों रक्तदान करने जिला अस्पताल आए और डा.राजेंद्र प्रसाद की बिटिया को रक्तदान किया। इसके पूर्व 26 अप्रैल को पति पत्नी दोनों एक साथ प्लाज्मा डोनेट करले झांसी गए थे। पूर्व में वह अगस्त में कोरोना पॉजिटिव थे लंबा समय निकलने के कारण उनकी एंटीबॉडीज नहीं निकली आज भले ही वह प्लाज्मा डोनेट नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने आज एक साथ रक्तदान कर मानवता के प्रति अपना संकल्प पूरा किया। बताया गया कि आगामी 6 मई 2021 गुरुवार को भगवान महावीर नेत्र चिकित्सालय में विशाल निशुल्क एंटीबॉडीज परीक्षण एवं ब्लड ग्रुप परिक्षण शिविर लगाया जा रहा है जिसमें वह लोग भी अपनी जांच करा सकते हैं जिनको कोरोना नहीं हुआ हो और उन्हें आशंका हो कि वह पूर्व में थोड़े से बीमार हुए हो। अगर एंटीबॉडीज बनती है तो वह लोग प्लाज्मा डोनेट कर लोगों को कोरोना संक्रमण से लडऩे में मदद कर सकते हैं और अगर एंटीबॉडीज नहीं बनती है वह रक्तदान कर और लोगों की जान बचा सकते हैं।

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